
ऐप लोन के चक्कर में पूरे परिवार की गई जान, ऐसे गिरोह से कैसे बचें? जानिए RBI की गाइडलाइंस
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देश में डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) से जुड़े फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं. इन्हें लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कदम भी उठाए गए हैं और कड़ी गाइडलाइंस तय की गई हैं. बावजूद इसके इनपर शिकंजा नहीं लग पा रहा है. इसके जाल में फंसकर भोपाल के एक हंसता-खेलता परिवार काल के गाल में समा गया.
अगर आप मोबाइल फोन यूज करते हैं, आए दिन झटपट लोन अप्रूव (Loan) करने के मैसेज और कॉल अक्सर आते होंगे. लेकिन कहते हैं न कर्ज के जंजाल से जितना दूर रहें, उतना अच्छा है. इसके जाल में फंसकर न सिर्फ लोन लेने वाला बल्कि पूरा परिवार ही तबाह हो जाता है. लोन बांटने वाले रेप्युटेड बैंकों को छोड़ दें, तो आजकल कई ऐसे लोन एप्स (Digital Loan App) चल रहे हैं, जो ग्राहकों को पहले प्रलोभन देकर फंसाते हैं और फिर ऐसा फंसा देते हैं कि उनके बच निकलने का रास्ता ही नहीं रहता.
इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में देखने को मिला, जहां ऐप लोन के चक्कर में फंसकर एक पूरे हंसते-खेलते परिवार ने खुदकुशी कर ली. हालांकि, ऐसे ऐप्स पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पहले से ही गाइडलाइंस (RBI Guidelines on App Loans) बना रखी हैं, फिर भी ये लोगों को आसानी से फंसाने में कामयाब हो रहे हैं.
कर्ज के जाल में खत्म हो गईं 4 जिंदगी सबसे पहले बात करते हैं उस दिल दहला देने वाली घटना की, जिसके पीछे ऐप लोन बड़ी वजह है. तो बता दें भोपाल में एक शख्स को लोन रिकवरी के लिए इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने दो छोटे-छोटे बच्चों और पत्नी के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली. मृतकों में 8 साल का बेटा, तीन साल की बेटी समेत पति-पत्नी शामिल हैं.
एक छोटी सी गलती इस परिवार पर इतनी भारी पड़ी की बच्चों को जहर देकर सामूहिक खुदकुशी जैसा फैसला लेना पड़ा. घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे पढ़ने पर साफ होता है कि इस परिवार को मार्केट में फैला ऐप्स लोन का जंजाल निगल गया. इस तरह के एक-दो नहीं बल्कि ढेर सारे ऐप्स चलन में हैं और लोगों को सस्ती दर पर मिनटों में लोन दिलाने का वादा करके अपना शिकार बना रहे हैं.
डिजिटल लोन को लेकर RBI सख्त देश में डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) से जुड़े फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं. इन्हें लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कदम भी उठाए गए हैं और कड़ी गाइडलाइंस तय की गई हैं. बावजूद इसके इनपर शिकंजा नहीं लग पा रहा है. केंद्रीय बैंक ने एक वर्किंग ग्रुप ऑन 'डिजिटल लेंडिंग इन्क्लूडिंग लेंडिंग थ्रू ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स एंड मोबाइल ऐप्स' (WGDL) का गठन किया था, जिसने 13 जनवरी 2021 को अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसे आरबीआई ने वेबसाइट पर अपलोड किया था.
दिशा-निर्देशों के मुताबिक केंद्रीय बैंक द्वारा डिजिटल उधारदाताओं को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. इनमें आरबीआई द्वारा रेग्युलेटेड संस्थाएं और लेंडिंग कारोबार करने की अनुमति, अन्य वैधानिक और नियामक प्रावधानों के अनुसार लेंडिंग के लिए ऑथराइज्ड संस्थाएं (जो आरबीआई द्वारा विनियमित नहीं हैं) और किसी भी वैधानिक या नियामक प्रावधानों के दायरे से बाहर उधार देने वाली संस्थाएं शामिल हैं.

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