
एसआईआर मामले में ममता की निजी पेशी पर SC में याचिका, हस्तक्षेप की मांग
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पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की गई है. अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि यह मामला राज्य की संस्थागत कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग से जुड़ा है, इसलिए ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पेश होनी चाहिए थीं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले' में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल की गई है. यह आवेदन अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दायर किया गया है, जिसमें उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.
याचिका में कहा गया है कि जिन मुद्दों पर सुनवाई हो रही है, वे सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल राज्य की संस्थागत कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग के साथ उसके संवैधानिक संबंधों से जुड़े हैं. ऐसे में ममता बनर्जी, जो वर्तमान में राज्य की मुख्यमंत्री हैं, व्यक्तिगत हैसियत से अदालत में पेश नहीं हो सकतीं.
ममता की व्यक्तिगत उपस्थिति को बताया 'संवैधानिक रूप से अनुचित'
याचिकाकर्ता का तर्क है कि उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार के वकीलों के जरिए 'पश्चिम बंगाल राज्य सरकार' के रूप में पेश होना चाहिए था. सतीश अग्रवाल की याचिका में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत उपस्थिति को 'संवैधानिक रूप से अनुचित, संस्थागत रूप से अवांछनीय और कानूनी रूप से अस्थिर' बताया गया है.
'बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया बेहद जरूरी'
याचिका में कहा गया है कि पद पर रहते हुए किसी मुख्यमंत्री का इस तरह व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होना उचित नहीं है. इसके अलावा याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया बेहद जरूरी है, क्योंकि राज्य में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ की बड़े पैमाने पर समस्या बताई जा रही है. मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है.

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