
एक साल में ही उमर की सियासत पर उठे सवाल, न अपनों को संभाल पा रहे, न कांग्रेस के साथ बैलेंस
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जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार को एक साल ही हुआ है, लेकिन न ही वे अपने नेताओं को संभाल पा रहे हैं और न सहयोगी कांग्रेस के साथ बैलेंस बनाकर चलते देखे जा रहे हैं. उमर की पार्टी नेशनल कॉफ्रेंस के दो सांसदों ने बागी तेवर अपना रखा है. ऐसे में सीएम उमर कैसे सियासी संकट से बाहर निकलेंगे?
जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को अभी एक साल ही हुआ है, लेकिन उनके कामकाज के तरीके और नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं. ये सवाल किसी विपक्ष के द्वारा नहीं उठाए जा रहे हैं बल्कि उमर अब्दुल्ला की अपनी ही पार्टी के सांसदों द्वारा उठाए जा रहे हैं. कांग्रेस पहले से सियासी मौके की तलाश में है और वक्त की नज़ाकत को देखते हुए अपने तेवर दिखा दिए हैं.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला और सांसद मियां अल्ताफ़ अहमद लारवी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है. दोनों ही नेताओं ने अब्दुल्ला पर पार्टी को कमजोर करने और विधानसभा चुनाव में किए वादे को न पूरा करने को लेकर घेरा है.
कांग्रेस के साथ पहले से ही उमर अब्दुल्ला का सियासी तालमेल बिगड़ा हुआ है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सांसदों के रुख को देखते हुए कांग्रेस ने भी अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं और साथ ही कह दिया है कि अगर उमर अब्दुल्ला का मौजूदा रवैया जारी रहा तो उसे गठबंधन पर पुनर्विचार करना पड़ेगा. ऐसे में अब देखना है कि उमर अब्दुल्ला इस सियासी मझधार से कैसे पार पाते हैं?
उमर से एनसी के दो सांसद नाराज
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के पांच साल बाद 2024 में विधानसभा चुनाव हुए थे. उमर अब्दुल्ला के अगुवाई वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन चुनावी जंग जीतने में सफल रही. उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने और सत्ता की कमान संभाली, लेकिन कांग्रेस को मन के मुताबिक मंत्री पद न मिलने से वह सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन कर रही है.
उमर अब्दुल्ला की सरकार को एक साल हुए अभी 15 दिन गुजरे हैं, लेकिन उनके कामकाज और रवैये को लेकर अपने ही नाराज़ हैं. अनंतनाग-राजौरी से एनसी सांसद मियां अल्ताफ अहमद ने सीधे मुख्यमंत्री की कार्यकुशलता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर मैं कहूं कि उमर साहब सही रास्ते पर हैं तो यह गलत होगा, और यह उन्हें धोखा देना होगा. वहीं, आगा सैयद रुहुल्ला तो बागी तेवर अपना रखे हैं और लगातार उमर अब्दुल्ला पर हमलावर हैं.

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