
एक घर, चार लाशें और पांच कत्ल... वाराणसी में गुप्ता परिवार के सामूहिक हत्याकांड की उलझी हुई खौफनाक कहानी
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जब एक ही घर के चार-चार लोगों के मर्डर की खबर फैली, तो वाराणसी में अटकलों का दौर शुरू हो गया. राजेंद्र गुप्ता कुख्यात शख्स था. सालों पहले उस पर खानदानी जायदाद को लेकर हुए झगड़े में अपने ही भाई कृष्ण और उसकी पत्नी मंजू का कत्ल करने का आरोप लगा था.
Varanasi Gupta Family Mass Murder Mystery: वाराणसी में मंगलवार को भदैनी की संकरी गलियों और पत्थर की इमारतों पर सूरज की रोशनी पड़ते ही भोर चुपचाप ढल चुकी थी. लेकिन एक घर में खौफनाक सन्नाटा पसरा हुआ था. यह भेलूपुर के बीचोबीच बसा गुप्ता परिवार का घर था. वहां रहने वाली नीतू गुप्ता और उनके तीन बच्चों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया था. उनके जिस्म मानों लहू से सन कर जम गए थे, हर जिस्म पर एक-एक गोली का जख्म नुमाया था, जो उनकी जिंदगी के आखिरी पलों की खौफनाक कहानी की तरफ इशारा कर रहा था. बस घर का मुखिया राजेंद्र गुप्ता कहीं लापता था.
जब घर के चार-चार लोगों की मौत की खबर फैली, तो वाराणसी में अटकलों का दौर शुरू हो गया. राजेंद्र गुप्ता कुख्यात शख्स था. सालों पहले उस पर खानदानी जायदाद को लेकर हुए झगड़े में अपने ही भाई कृष्ण और उसकी पत्नी मंजू का कत्ल करने का आरोप लगा था. उसके हाथ परिवार के खून से रंगे थे, और ये बात शहर को याद थी. इसलिए, जब गुप्ता परिवार के चार लोगों का कत्ल हुआ, तो फौरन यह अनुमान लगाया गया कि राजेंद्र गुप्ता ने, शायद बेकाबू गुस्से में आकर परिवार को मार डाला था और फिर भाग निकला. लेकिन मामला इतना सीधा नहीं था.
चार लाशों की बरामदगी के कुछ घंटों बाद, पुलिस ने राजेंद्र के मोबाइल लोकेशन को रोहनिया में पंद्रह किलोमीटर दूर एक निर्माणाधीन इमारत में ट्रैक किया. वहां, एक खाली, आधे-अधूरे घर में राजेंद्र गुप्ता का जिस्म पड़ा था- फर्श पर बेजान. उसके सीने में कई गोलियों के घाव थे, जिनसे खून बह रहा था. ये मंजर हैरान करने वाला था और खौफनाक भी. और इससे भी अजीब बात यह थी कि आस-पास कोई हथियार मौजूद नहीं था.
वाराणसी पुलिस के अनुभवी अधिकारी मौके पर मौजूद थे, वो हैरान होकर मौका-ए-वारदात पर खड़े थे. उनमें से एक ने बुदबुदाया 'तीन गोलियां, कोई हथियार नहीं, संघर्ष का कोई निशान नहीं...' उनके जेहन में सवाल कुलबुला रहा था- अगर उसने खुद को नहीं मारा, तो किसने मारा?
निर्माणाधीन घर राजेंद्र गुप्ता का ही नया प्रोजेक्ट था. वो उसका एक ऐसा निवेश था, जिससे वो अपने कारोबार की तकदीर बदलने की उम्मीद कर रहा था. लेकिन इंस्पेक्टर मेहता जिस चीज को नजरअंदाज नहीं कर सकते थे, वह था राजेंद्र का विवादित अतीत और दशकों से चली आ रही गहरी दुश्मनी. क्या यह उसके भाई की हत्या का बदला था? या फिर किसी ने शक को दूर करने के लिए राजेंद्र की बदनामी का फायदा उठाया था?
शुरुआती तौर पर पुलिस घटना के पीछे की वजह पारिवारिक विवाद और पुरानी रंजिश ही मानकर चल रही है. क्योंकि, मृतक राजेंद्र गुप्ता ने वर्ष 1997 में ठीक इसी दिन (मंगलवार) अपने पिता के साथ एक सुरक्षाकर्मी और अन्य व्यक्ति की हत्या की थी. आरोप के मुताबिक, राजेंद्र ने अपने भाई कृष्णा और भाभी मंजू को भी सोते वक्त गोली मारी थी.

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