
इमरान खान की कुर्सी कैसे जाएगी? पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने बताया गणित
AajTak
हामिद मीर ने कहा कि इमरान ने आधिकारिक लेटर भले ही 29 मार्च को जारी किया है. लेकिन वे अपनी पार्टी के सदस्यों से पहले से ही कहते आ रहे हैं कि उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दिन नेशनल असेंबली में उपस्थित नहीं होना है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. उनके खिलाफ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है. अब 31 मार्च को इस पर चर्चा होनी है. इस बीच इमरान ने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सदस्यों को वोटिंग से दूरी बनाने की हिदायत दी है. कहा जा रहा है कि इमरान को अपनी पार्टी के सदस्यों पर ही भरोसा नहीं है कि वे उनके पक्ष में वोट करेंगे. पड़ोसी देश में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच वहां के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने आजतक को बताया कि आखिर कैसे इमरान खान की कुर्सी जाना करीब-करीब तय है.
हामिद मीर ने कहा कि इमरान ने आधिकारिक लेटर भले ही 29 मार्च को जारी किया है. लेकिन वे अपनी पार्टी के सदस्यों से पहले से ही कहते आ रहे हैं कि उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दिन नेशनल असेंबली में उपस्थित नहीं होना है. मीर ने बनाया कि PTI के 14 सदस्य साफतौर पर कह चुके हैं कि वे विपक्ष के साथ हैं. उनकी पार्टी के 8 सदस्य ऐसे हैं, जो खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि वे भी विपक्ष को समर्थन देंगे. इस तरह करीब 24 सदस्य विपक्ष के साथ हैं, जबकि विपक्ष को सिर्फ 10 सदस्यों की ही जरूरत है.
हामिद मीर ने कहा कि विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव पास कराने के लिए 172 सदस्यों की जरूरत है, लेकिन उन्हें 190 सदस्यों का समर्थन मिल सकता है. उन्होंने बताया कि इमरान इसलिए नहीं चाहते की उनकी पार्टी के सदस्य वोटिंग में शामिल हों, क्योंकि वोटिंग के दौरान बगावत करने वालों की संख्या 24 से बढ़कर 40 तक हो सकती है. इमरान को भरोसा नहीं है कि उनकी पार्टी के सदस्य उनके साथ खड़े होंगे. PTI के सदस्य इस भरोसे पर इमरान का खुलकर विरोध कर रहे हैं कि आने वाले चुनाव में विपक्षी पार्टी उन्हें टिकट देगी.
मीर ने आगे बताया कि इमरान कुर्सी जाने के डर के चलते पीएमएलक्यू जैसी छोटी पार्टी को पंजाब का मुख्यमंत्री पद दे चुके हैं. जबकि इस पार्टी के पास नेशनल असेंबली में 5 ही सदस्य हैं. पीएमएलक्यू को 3 केंद्रीय मंत्री पद का भी लालच दिया गया है. हालांकि, आगे चलकर इससे इमरान की पार्टी में ही असंतोष पैदा होगा. इमरान सरकार की सहयोगी पाकिस्तान नेशनल पार्टी के 4 सदस्य, निर्दलीय सदस्य असलम मुल्तानी और एक अन्य पार्टी भी विपक्ष के साथ हो गए हैं. विपक्ष को जितनी संख्या चाहिए थी, उनके पास उससे ज्यादा सदस्य हैं.
ये है पाकिस्तान में बहुमत का गणित
पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य हैं. बहुमत का आंकड़ा 172 है. पीटीआई के नेतृत्व वाला गठबंधन 179 सदस्यों के समर्थन से बनाया गया था, जिसमें इमरान खान की पीटीआई में 155 सदस्य और चार प्रमुख सहयोगी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कायद, बलूचिस्तान अवामी पार्टी और ग्रैंड डेमोक्रेटिक अलायंस सदस्य हैं. बताया जा रहा है कि चार सहयोगियों में से तीन- एमक्यूएम-पी, पीएमएल-क्यू (अब मुकर गई) और बीएपी ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन दिया था.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

आज यु्द्ध का 24वां दिन है. इजरायल पर ईरान और जवाब में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस बीच सवाल ये कि क्या डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज पर फंस गए हैं. ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से लग रहा है कि जंग छेड़ने से पहले हॉर्मुज को लेकर ट्रंप सोच नहीं पाए थे. देखें कैसे बदलते जा रहे ट्रंप के बयान.









