
'इन हाथियों को मारो और इनका मांस लोगों में बांट दो', क्यों यहां की सरकार ने की ऐसी घोषणा?
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इस देश में दर्जनों हाथियों को मार दिया जाएगा और उसके मांस लोगों में बांटे जाएंगे. ऐसा फैसला हाथियों की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है.
इन दिनों एक देश अपने एक अजीब फैसले की वजह से चर्चा में है. यहां कई दर्जन हाथियों को मारने का आदेश दिया गया है. साथ ही हाथियों को मारकर उनका मांस लोगों में बांट देने को कहा गया है. आखिर ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि हाथियों को मारने का आदेश देना पड़ा? जानते हैं किस देश में ऐसा किया जा रहा है?
दरअसल, जिम्बाब्वे में दर्जनों हाथियों को मारकर उनका मांस लोगों में बांटने का फैसला किया गया है. वहां के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि वे हाथियों की जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं.
यहां बढ़ रही है हाथियों की जनसंख्या जिम्बाब्वे ने घोषणा की है कि वहां दर्जनों हाथियों को मार दिया जाएगा और उसके मांस लोगों में बांटे जाएंगे. ऐसा फैसला हाथियों की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है. ये घोषणा जिम्बाब्वे पार्क एवं वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण ने की है. इसे जिम्पर्क्स के नाम से भी जाना जाता है.
हाथियों की बढ़ती संख्या से इकोसिस्टम को पहुंच सकता है नुकसान जिम्पर्क्स ने कहा कि उसने दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बड़े निजी स्पोर्ट्स रिजर्व, सेव वैली कंजर्वेंसी को "हाथी के मैनेजमेंट प्रैक्टिस के लिए" परमिट जारी किया है.एजेंसी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि प्रबंधन कोटा का उद्देश्य क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना है और शुरुआत में 50 हाथियों को लक्षित किया जाएगा.
800 क्षमता वाले वैली में हैं 2250 हाथी 2024 के हवाई सर्वेक्षण के अनुसार, सेव वैली कंजर्वेंसी के इकोसिस्टम की क्षमता 800 हाथियों को वहन करने की है. जबकि वहां 2,550 हाथी हैं. जिम्पर्क्स के अनुसार, हाथियों की आबादी को नियंत्रित करने और वन्यजीव आवास की सुरक्षा के लिए रिजर्व ने पिछले पांच वर्षों में 200 हाथियों को दक्षिणी अफ्रीकी देश के अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया है.
स्थानीय समुदाय में बांटे जाएंगे हाथी के मांस एजेंसी ने कहा कि प्रबंधन से प्राप्त हाथी का मांस स्थानीय समुदायों में वितरित किया जाएगा, जबकि हाथी दांत राज्य की संपत्ति होगी, जिसे सुरक्षा के लिए जिम्पर्क को सौंप दिया जाएगा. हाथीदांत के व्यापार पर वैश्विक प्रतिबंध के कारण जिम्बाब्वे को हाथीदांत के अपने भंडार को बेचने पर रोक लग गई है.

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