
इंडिया गेट प्रदर्शन मामले में 22 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए, पुलिसकर्मियों पर मारपीट के लगे आरोप
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दिल्ली के इंडिया गेट प्रदर्शन में गिरफ्तार कई आरोपियों ने कोर्ट में दावा किया कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ. हालांकि, प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार 23 में से 22 आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
दिल्ली में नक्सली कमांडर मांडी हिडमा की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था. शनिवार को इस मामले में बड़ी अदालती कार्रवाई हुई. पटियाला हाउस कोर्ट ने 23 में से 22 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. यह प्रदर्शन कर्तव्य पथ और संसद मार्ग - दोनों इलाकों में हुए थे.
जज अरिदमन सिंह चीमा की अदालत में छह आरोपियों को पेश किया गया. इनमें पांच बालिग और एक ने नाबालिग होने का दावा किया. पुलिस ने दो दिन की कस्टडी मांगी, लेकिन कोर्ट ने दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और याचिका खारिज कर दी.
संसद मार्ग पर गिरफ्तार 17 आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, नक्सल हिडमा के समर्थन में नारे लगाए और पेपर पाउडर स्प्रे किया. पुलिस ने कोर्ट में वीडियो दिखाया जिसमें कुछ लोग स्प्रे करते नजर आए. पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन प्रदूषण पर था, फिर नक्सली नारे क्यों लगे?
पुलिस की दलील: पूरी तैयारी से आए थे आंदोलनकारी
पुलिस ने कहा कि इन लोगों को चार बार रोका गया, लेकिन वे आगे बढ़ते रहे. उनका कहना था कि हिरासत मिलने से नक्सल लिंक की पड़ताल की जा सकेगी. पुलिस ने यह भी कहा कि हिरासत में दुर्व्यवहार की आशंका नहीं है, क्योंकि जांच अभी शुरुआती स्तर पर है.
बचाव पक्ष का तर्क: ये छात्र हैं, FIR में नक्सलवाद का जिक्र नहीं

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