
आयरन डोम की भी लिमिट है, US को बचाव में उतरना पड़ा... इस युद्ध के इजरायल के लिए क्या सबक?
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इजरायल-ईरान युद्ध ने इजरायल को अपनी ताकत और कमजोरियों दोनों का आकलन करने का मौका दिया. आयरन डोम की सीमाएं, नागरिक सुरक्षा की कमी, जासूसी की ताकत, क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत और आर्थिक-सामाजिक प्रभाव इस युद्ध के प्रमुख सबक हैं. इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन अपनी कमजोरियों को भी देखा.
इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और मिसाइल सुविधाओं पर हमला किया, जबकि अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर में बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हमले किए. जवाब में, ईरान ने इजरायल पर 450 से अधिक मिसाइलें और 1000 ड्रोन दागे.
इस युद्ध में इजरायल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली की सीमाएं उजागर हुईं. कई रणनीतिक कमजोरियां सामने आईं. आइए जानते हैं इजरायल के लिए इस युद्ध से मिले पांच प्रमुख सबकों को वह भविष्य में अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत कर सके.
1. आयरन डोम की सीमाएं: मिसाइल रक्षा की चुनौती
इजरायल की आयरन डोम दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक है, जो छोटी और मध्यम दूरी की मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में सक्षम है. इस युद्ध में आयरन डोम ने ईरान की 450 मिसाइलों और 1000 ड्रोनों में से 90% को रोक लिया. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार ईरान की हाज कासेम और खैबर शेकन मिसाइलों ने आयरन डोम को चकमा दिया. बटयम, तेल अवीव और बीर शेवा में नुकसान पहुंचाया. सोरोका मेडिकल सेंटर पर हमले में 76 लोग घायल हुए.
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