
आतंकियों और गैंगस्टर्स के पास मिले रहे US मेड NATO के आधुनिक हथियार... आखिर ये भारत पहुंच कैसे रहे हैं?
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अमेरिकी और NATO के हथियार तस्करी के जरिए भारत में पहुंच रहे हैं, जो पंजाब और कश्मीर में आतंकवादियों और अपराधियों के हाथों में जा रहे हैं. इन हथियारों का उपयोग आतंकवादी संगठनों द्वारा भारतीय सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमलों के लिए किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौती मिल रही है.
पंजाब के शेरोन में एक चेकपॉइंट पर तैनात पुलिस दल ने देखा कि एक कार को लापरवाही से चलाया जा रहा है. उन्होंने तुरंत मारुति सुजुकी स्विफ्ट को रुकने का इशारा किया. कार में बैठे लोगों ने कार रोकने की बजाय भागने की कोशिश की। हालांकि, वे भाग नहीं पाए और पुलिस बैरिकेड्स से टकरा गए.
पुलिस ने पाया कि कार में हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी और लवप्रीत सिंह बैठा हुआ था, जिनका आपराधिक इतिहास है. वाहन की तलाशी में चार ग्लॉक 19 पिस्टल, जिनमें से एक पर 'मेड फॉर NATO आर्मी' लिखा था, चार मैगजीन, सात जिंदा कारतूस और 4.8 लाख रुपये की हवाला की रकम मिली.
इस कामयाब ऑपरेशन के बाद पंजाब के डीजीपी ने कहा कि हरप्रीत सिंह का सीधा संबंध पाकिस्तान स्थित एक तस्कर से था, जो ड्रोन के जरिए भारत-पाकिस्तान सीमा पार से हथियार और ड्रग्स की सप्लाई करता था. तरण तारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव तोरा ने कहा, 'जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी हरप्रीत ने कई बार अपराधियों को हथियारों की सप्लाई की है.'
NATO के लिए बनाए गए हथियारों की बरामदगी पंजाब के इस घटना तक ही सीमित नहीं है. यह घटना दिखाती है कि कैसे अमेरिका द्वारा बनाए गए और NATO के लिए भेजे गए हथियार भारत में आतंकवादियों और अपराधियों के हाथों में पहुंच रहे हैं, जो देश की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों से भी इसी तरह के NATO-ग्रेड हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं. इस तरह की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ग्लोबल हथियारों की तस्करी और आतंकवाद के बीच एक खतरनाक गठजोड़ बना हुआ है.
ऐसे में सवाल उठता है कि ये हथियार वैध सैन्य भंडार से काले बाजार में कैसे पहुंचते हैं, और फिर वे भारत में कैसे और क्यों आते हैं?

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