
आज का दिन: जेपी नड्डा ने अमित शाह की तुलना में BJP को कितना बदला?
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BJP को किस तरह मजबूत कर रहे हैं जेपी नड्डा?, राजस्थान के सियासी घटनाक्रम पर सचिन पायलट की चुप्पी को क्या समझा जाए? क्या आज मीटिंग में सुलझ पाएंगे आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के विवादित मुद्दे? और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले टीम में क्या बदलाव हुए हैं?
आजतक रेडियो पर हम रोज लाते हैं, देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’ जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की खबरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अखबारों की सुर्खियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब-किताब. जानिए, आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन खबरों पर बात कर रहे हैं?
BJP को किस तरह मज़बूत कर रहे हैं जेपी नड्डा?
अमित शाह का बतौर बीजेपी चीफ़ कार्यकाल पूरा हुआ तो जेपी नड्डा उनकी जगह आए. लेकिन उनका तीन साल का कार्यकाल 20 जनवरी 2023 को पूरा हो, इससे पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें एक्सटेंशन मिलने जा रहा है. नड्डा अप्रैल-मई 2024 तक के लिए पार्टी अध्यक्ष बने रह सकते हैं. पिछले तीन बरस का उनका कार्यकाल कैसा रहा, उन्हें ये एक्सटेंशन क्यों दिया जा रहा, अमित शाह के बाद जेपी नड्डा दोनों के कार्यकाल की अगर तुलना करें तो वो किस तरह अलग है, क्या जेपी नड्डा नया कुछ किया है और या पुरानी चीज़ों को ही बस आगे बढ़ाया है?
राजस्थान में चल रहे कांग्रेस के बवाल पर चुप क्यों हैं सचिन पायलट?
अदावत दो नेताओं के बीच की एक पार्टी को बड़ी भारी पड़ रही है. कांग्रेस जो अब तक केंद्र के स्तर पर अध्यक्ष तलाश रही थी. वो राजस्थान में पैदा हुए क्राइसिस, या कि पहले से कम आंच पर पक रहे एक ग़ुबार को शांत करने में जुटी हुई है. कल सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सीनियर लीडर अजय माकन ने कहा कि जो भी राजस्थान में रविवार को हुआ, वे लिखित में उसकी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौपेंगे. उन्होंने राजस्थान कांग्रेस के विधायकों, मुख्यमंत्री पर कार्रवाई को लेकर वैसे तो कुछ नहीं कहा लेकिन ऐसी चर्चा है कि कुछ नेताओं पर कार्रवाई तय है. हां, जब तक अध्यक्ष पद के लिए नामांकन चलेगा यानी 30 सितम्बर तक, तब तक राजस्थान में यथास्थिति ही बनी रहेगी. वहीं, बतें ऐसी भी हैं बाज़ार में कि पार्टी अशोक गहलोत से आगे बढ़कर अब दिग्विजय सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक और कैसी वेणुगोपाल में बतौर कांग्रेस अध्यक्ष सम्भावना तलाशने लगी है. तो इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस हाईकमान को किस असमंजस में डाल दिया है, और क्या वो अब गहलोत को अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार कर पाएगा? इस पूरे प्रकरण के दौरान पायलट की चुप्पी की वजह क्या है?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच किन विवादित मुद्दों पर होगी बात?

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










