
अब दिल्ली विधानसभा में CM रेखा बनाम आतिशी, दोनों के सामने होंगी ये चुनौतियां
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आम आदमी पार्टी हाल में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनाव में 62 सीटों से नीचे गिरकर 22 सीटों पर आ गई. पार्टी के बड़े-बड़े धुरंधर जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन, सोमनाथ भारती शामिल हैं, चुनाव हार गए. लेकिन कालकाजी में काफी कड़े मुकाबले में आतिशी ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को हराने में सफलता पाई.
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली असेंबली में पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी को अपने विधायक दल का नेता चुना है. इस तरह दिल्ली की 8वीं विधानसभा में दो महिलाएं अपनी-अपनी पार्टी का नेतृत्व करेंगी. रेखा गुप्ता को भाजपा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया की महिला सशक्तिकरण के लिए उसकी बातों में काफी दम है.
रेखा गुप्ता भारतीय जनता पार्टी में लगभग तीन दशकों से सक्रिय रही हैं और दिल्ली की सियासत को भली-भांति समझती हैं. आतिशी यूं तो दूसरी बार कालकाजी सीट से चुनकर विधानसभा में आई हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति में दिल्ली का मुख्यमंत्री बनना उनके राजनीतिक करियर कि अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
आतिशी को AAP ने क्यों चुना नेता प्रतिपक्ष?
आम आदमी पार्टी हाल में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनाव में 62 सीटों से नीचे गिरकर 22 सीटों पर आ गई. पार्टी के बड़े-बड़े धुरंधर जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन, सोमनाथ भारती शामिल हैं, चुनाव हार गए. लेकिन कालकाजी में काफी कड़े मुकाबले में आतिशी ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को हराने में सफलता पाई. वरिष्ठता के मुताबिक आम आदमी पार्टी के पास गोपाल राय, संजीव झा, जरनैल सिंह और सोम दत्त जैसे विकल्प मौजूद थे.
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लेकिन आम आदमी पार्टी ने उन सब पर पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी को तरजीह दी. भले यह कहा जा रहा हो कि मुख्यमंत्री महिला हैं, ऐसे में विपक्ष का नेता भी एक महिला नेता हो तो उसे विधानसभा के अंदर चुनौती देना आसान होगा. लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है. आतिशी, अरविंद केजरीवाल की विश्वासपात्र भी हैं. आम आदमी पार्टी को करीब से जानने वाले यह बताते भी हैं कि अरविंद केजरीवाल पार्टी के अंदर बहुत कम लोगों पर ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए भरोसा करते हैं.

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