
चेन बांधकर भारतीयों को डिपोर्ट करने वाला US... उमर खालिद से पहले भी भारत के आंतरिक मामलों में देता रहा है दखल!
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आठ अमेरिकी सांसदों ने उमर खालिद की UAPA के तहत जारी हिरासत पर कथित तौर पर चिंता जताई है. पत्र में भारत से “निष्पक्ष और शीघ्र सुनवाई” की अपील की गई. यह पत्र ऐसे समय आया जब भारत बार-बार स्पष्ट करता रहा है कि हर आरोपी को कानून के तहत न्यायिक संरक्षण मिलता है और मामले अदालतों में विचाराधीन हैं.
आठ अमेरिकी सांसदों ने उमर खालिद के मामले में 'न्यायसंगत ट्रायल', 'जल्द सुनवाई' और 'मानवाधिकार मानकों' का पालन करने की अपील भारत सरकार से की है. यह चिट्ठी भारत के अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को लिखी गई है, जिसमें खालिद की पांच साल से अधिक की हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के खिलाफ बताया गया है. उमर खालिद 2020 दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में यूएपीए के तहत जेल में है.
न्याय के मानकों का ये मापदंड उस अमेरिका का है जिसने 73 साल की सिख महिला को चेन बांधकर यूएस से इंडिया डिपोर्ट किया था. ये घटना पिछले साल सितंबर की है.
अपनी उम्र, खराब सेहत और कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड न होने के बावजूद, US इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने उसे डिपोर्टेशन फ्लाइट में बिठाने से पहले हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़ दिया.
हरलीन कौर अमेरिका के ईस्ट बे में शांति से रह रही थीं और दर्जी का काम करती थीं, उनका इमिग्रेशन एप्लीकेशन 2013 में रिजेक्ट हो गया था. तब से वह हर छह महीने में ICE को रेगुलर रिपोर्ट करती थीं और कभी भी कोई अपॉइंटमेंट मिस नहीं किया. लेकिन एक दिन हरलीन कौर को इमिग्रेशन अचानक पकड़ा और बेडियों में जकड़ा और भारत जाने वाली फ्लाइट में डाल दिया.
इसी अमेरिका के सांसदों ने अब भारत की न्याय प्रणाली को शक भरी निगाहों से देखा है.
भारत सरकार और कूटनीतिक हलकों का मानना है कि यह पत्र न्यायिक प्रक्रिया में दखल जैसा है, क्योंकि भारत का संविधान न्यायपालिका को स्वतंत्र अधिकार देता है और किसी भी मामले में अंतिम फैसला केवल अदालतें करती हैं, न कि कार्यपालिका और विदेशी सांसद तो कतई नहीं.

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