
घर में तहखाना, कंकाल बन चुकी लड़की और एक मुर्दा जिस्म... रोंगटे खड़े कर देगी हैवानियत की ये कहानी
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यूपी में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला ऐसा मामला सामने आया है. जिसे सुनकर हर कोई हैरान परेशान है. ये कहानी एक परिवार के बिखरने का अहसास और लालच में गिरते इंसान के किरदार को बयां करती है. ये ऐसी सच्ची दास्तान है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया.
Mahoba Basement Horror: किसी भी इंसान के लिए उसका घर ही दुनिया की सबसे महफूज जगह होती है. लेकिन जरा सोचिए अगर किसी को जीते-जी खुद उसी के घर में क़ैद कर दिया जाए और कैद भी ऐसा-वैसा नहीं बल्कि 'अंधे तहखाने' में पूरे पांच सालों तक, तो क्या होगा? ऐसी ही कहानी है यूपी के महोबा की, जहां एक बाप-बेटी के साथ खुद उन्हीं लोगों ने साजिश का ऐसा खेल खेला, जिन पर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी थी. दोनों सालों-साल कैद में रह कर भोजन-पानी और रौशनी की कमी से जीते-जीते 'जिंदा कंकाल' बन गए.
महोबा शहर की हिंद टायर वाली गली में मौजूद है एक साधारण सा दिखने वाला मकान. जहां से एक ऐसी भयानक कहानी निकली है, जो किसी की भी रूह कंपा सकती है. उसी मकान के अंदर मौजूद एक तहखाना है, जहां घुप्प अंधेरा है. कुछ भी साफ-साफ दिखाई नहीं दे रहा. लेकिन उसी अंधेरे में एक महिला समेत कुछ लोगों की आवाज सुनाई देती है. अब महिला आगे बढ़ कर एक स्विच ऑन करती है. इसी के साथ कमरे की लाइट जल उठती है. फिर महिला वापस मुड़ती है और बेड पर रखी रजाई हटाती है. पहली नजर में ही वो बेड इतना गंदा और सीलन भरा दिखता है कि उस पर किसी इंसान के सोने या आराम करने की बात तकरीबन नामुमकिन सी लगती है.
लेकिन जब महिला उसी बिस्तर पर रखे कंबल और लिहाफ की परतों अपने हाथों से हटाती है तो अंदर जो कुछ दिखता है, उससे वहां मौजूद सारे के सारे लोगों की सांसें ही मानों अटक जाती हैं. नीचे की हालत देख कर खुद कंबल हटाने वाली महिला के मुंह से चीखें निकल जाती हैं. किसी जिंदा इंसान का ऐसा रूप इससे पहले शायद ही कभी किसी ने देखा हो. असल में तहखाने में पड़े इस गंदे बिस्तर पर लिहाफ और कंबल के नीचे लोगों को जो कुछ नजर आया, उसे इंसान कम बल्कि जिंदा कंकाल कहना ही ज्यादा सही है. असल में उस इंसान के शरीर में मांस नाम की कोई चीज है ही नहीं. अगर कुछ है, तो वो है सिर्फ और सिर्फ हड्डियों का ढांचा और उस पर लिपटी इंसानी चमड़े की एक झीनी सी परत. सितम देखिए इंसान खुद तो हड्डियों का ढांचा भर रह गया है, ऊपर से उसका पूरा का पूरा जिस्म ही नग्न यानी बगैर कपड़ों के था.
हालत ये है कि सही भोजन, रौशनी, इलाज और दूसरी इंसानी जरूरत की चीजों की कमी से जिंदा कंकाल में बदल चुके इस इंसान को देख कर ना तो उसे पहचान पाना मुमकिन था और ना ही उसकी उम्र का सही-सही पता लगाना. एक बारगी उसे देखकर लगा, जैसे वो उम्र के आखिरी पड़ाव पर मौजूद कोई बहुत बुजुर्ग महिला हो. जो सही देखभाल की कमी से इस हाल में पहुंच गई हो. लेकिन वहां मौजूद लोग इस जिंदा कंकाल को देखते ही पहचान लेते हैं और उसकी उम्र बताते हैं. असल में हड्डियों के ढांचे में बदल चुकी वो लड़की महज 26-27 साल की है- नाम है रश्मि. जो खुद उसी घर की वारिस है, जिस घर के तहखाने में फिलहाल वो उस हालत में कैद थी.
अब आइए आपको ऐसे ही एक और मंजर के बारे में बताते हैं. जो उसी तहखाने का है और ठीक कंकाल की शक्ल में तब्दील हो चुकी उस लड़की रश्मि की तरह उस सीलन भरे गंदे बिस्तर पर लेटा एक शख्स भी था. वो शख्स भी इंसान कम और हड्डियों का ढांचा नजर आता है. बस रश्मि और इस शख्स में फर्क सिर्फ इतना है कि रश्मि अब भी जिंदा है और वो शख्स भोजन, इलाज और देखभाल की कमी से अभी अभी इस दुनिया से जा चुका था. यानी तहखाने में मौजूद हड्डियों के दो ढांचों में से फिलहाल एक जिंदा है और दूसरा सचमुच के कंकाल यानी लाश में तब्दील हो चुका है.
अब इससे पहले कि आपको दर्द में लिपटी ये पूरी कहानी सिलसिलेवार तरीके से सुनाएं, आइए सबसे पहले ठीक से दोनों की पहचान बता देते हैं. बिस्तर पर कंबलों के नीचे भूख-प्यास से तिल-तिल कर मरने वाले उस शख्स का नाम था ओम प्रकाश राठौर. जबकि पिता की लाश के पास बस किसी तरह जिंदा बची रश्मि, राठौर साहब की बेटी है. 70 साल के ओम प्रकाश राठौर कभी रेलवे के अधिकारी हुआ करते थे. भरा पूरा परिवार था. बीवी-बेटी साथ रहते थे. लेकिन धीरे-धीरे वक्त ने ऐसी पलटी मारी कि राठौर साहब की पत्नी की मौत हो गई और बाप-बेटी अकेले रह गए.

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