
अजनाला में हिंसा, पुलिस को चुनौती, फिर गिरफ्तारी... पढ़ें अमृतपाल की फरारी की 2 महीनों की Timeline
AajTak
अमृतपाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. 23 फरवरी को अजनाला कांड अमृतपाल की अगुवाई में हुआ था जहां थाने पर उसके साथियों ने हमला कर दिया था और पुलिस को यहां से भागना पड़ा था. इस दौरान पुलिस भी भीड़ पर काबू पाने में पुलिस भी विफल रही थी. इस हमले में छह पुलिस कर्मी घायल हुए थे.
अजनाला कांड के मुख्य आरोपी खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस काफी लंबे समय से अमृतपाल की तलाश कर रही थी और वो लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था. इस मामले को लेकर पुलिस की काफी किरकरी भी हुई थी. उसके सारे सहयोगियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. उसकी तलाशी के लिए पुलिस विभिन्न राज्यों से लेकर नेपाल तक पहुंच गई थी.
अमृतपाल मोगा से ही पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ था और लास्ट मूवमेंट उसकी शाहकोट में ही थी. उसके बाद नांगल अंबिया गांव से उसका एक सीसीटीवी सामने आया था, जहां वह बाइक पर बैठकर फरार हुआ. इसके बाद वह शाहबाद से पीलीभीत पहुंच गया था.
ये भी पढ़ें: देर रात मोगा पुलिस के सामने खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह ने किया सरेंडर
-23 फरवरी को अमृतपाल और उसके संगठन वारिस पंजाब दे से जुड़े लोगों ने अजनाला पुलिस थाने पर हमला कर दिया था. अमृतपाल और उसके समर्थकों के हाथ में तलवार, लाठी-डंडे थे. ये पूरा बवाल आठ घंटे तक चला था. ये बवाल अमृतपाल के समर्थक लवप्रीत तूफान की रिहाई को मांग को लेकर हुआ था. लवप्रीत तूफान को पुलिस ने बरिंदर सिंह नाम के शख्स को अगवा और मारपीट करने के आरोप में हिरासत में लिया था. हालांकि, बवाल के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया था. 23 फरवरी की इसी घटना के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया था. इसी मामले में अमृतपाल को पुलिस पकड़ने गई थी.
-18 मार्च: कई दिन तक अमृतपाल अजनाला कांड को लेकर सफाई भी देता रहा. लेकिन जैसे ही 18 मार्च को पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची तो वह फरार हो गया. उसकी तलाशी के लिए बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया. इस ऑपरेशन में सात जिलों की पुलिस टीमें शामिल थी.
-18 मार्च: अमृतपाल सिंह मोगा से ही पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ था और लास्ट मूवमेंट उसकी शाहकोट में मिली थी. उसके बाद नांगल पालिया गांव से उसका एक सीसीटीवी सामने आया था जिसमें वह बाइक पर बैठकर फरार हुआ.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








