
Yamaha Y-AMT: न क्लच और न ही लीवर! हाथ की उंगलियों से बदलेगा बाइक का गियर, गजब की है यामहा की ये तकनीक
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Yamaha Y-AMT: यामाहा ने इस बार कंपनी कुछ नया करने के विचार के साथ ही एक नई तकनीक को दुनिया के सामने पेश किया है. कंपनी ने बाइक्स के लिए एक नई ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन गियरबॉक्स को डेवलप किया है. जिसे "Yamaha Y-AMT" नाम दिया गया है.
एक समय था जब दोपहिया कंपनियों के बीच रफ्तार की जंग हुआ करती थी. यानी कि कौन सी कंपनी कितनी फास्टेस्ट बाइक का निर्माण कर सकती है. लेकिन अब प्रतिस्पर्धा की ये रेस तकनीक और फीचर्स की तरफ शिफ्ट हो चली है. यानी अब कंपनियां ऐसी टेक्नोलॉजी को विकसित करने पर फोकस कर रही हैं ताकि डेली ड्राइविंग को बेहतर और आसान बनाया जा सके. आमतौर पर मोटरसाइकिल राइडर्स के लिए गियर-शिफ्ट एक थकाउ प्रॉसेस की तरह महसूस होता है. लेकिन अब प्रमुख जापानी कंपनी यामहा इसका समाधान लेकर आई है.
टू-व्हीलर इंडस्ट्री में जापानी कंपनी यामाहा एक बड़ा नाम है और इस बार कंपनी कुछ नया करने के विचार के साथ ही एक नई तकनीक को दुनिया के सामने पेश किया है. कंपनी ने बाइक्स के लिए एक नई ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन गियरबॉक्स को डेवलप किया है. जिसे "Yamaha Y-AMT" नाम दिया गया है. ये नई तकनीक बाइक ड्राइविंग के एक्सपीरिएंस को पूरी तरह बदलने का मद्दा रखती है. तो आइये जानें इस तकनीक में क्या है ख़ास-
सबसे पहले तो यह बता दें कि, टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन कोई नई बात नहीं है. आज के समय में दुनिया भर में बेचे जाने वाले तकरीबन 90% स्कूटरों में कंटीन्यूअसली वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT) का इस्तेमाल किया जाता है. ये एक प्रकार का ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन है. जैसे कि भारत में होंडा अपने स्कूटरों में DCT तकनीक का इस्तेमाल करता है.
Yamaha Y-AMT:
इसी तर्ज पर यामहा ने ख़ासतौर पर मोटरसाइकिलों के लिए इस नए ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन को विकसित किया है. कंपनी का कहना है कि, यामाहा ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (Y-AMT) एडवांस गियर शिफ्टिंग तकनीक के साथ एक नए युग की शुरुआत है, जो स्पोर्ट्स राइडिंग के लिए एक नया आयाम पेश करेगा. तेज रफ्तार के दौरान भी फास्ट गियर-शिफ्टिंग आपके ड्राइविंग एक्सपीरिएंस को बेहतर बनाएगा.
कैसे काम करेगी ये तकनीक:

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

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