
World War 3 की आहटः ताइवान-यूक्रेन पर हमले का खतरा, चीन-रूस को अमेरिका का अल्टीमेटम
Zee News
ड्रैगन ताइवान पर कब्जा करना चाहता है, जबकि रूस की नजरें यूक्रेन पर हैं.
नई दिल्लीः ताइवान पर चीन का पैंतरा और यूक्रेन पर रूस की साजिश से तीसरे विश्व युद्ध का खतरा सिर पर आ गया है. एक तरफ चीन और रूस हैं तो दूसरी तरफ अमेरिका और नाटो देश. ड्रैगन ताइवान पर कब्जा करना चाहता है, जबकि रूस की नजरें यूक्रेन पर हैं. संकेत मिल रहे हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पुराने सोवियत यूनियन वाला रुतबा दोबारा कायम करने को बेताब हैं.
यूक्रेन के बॉर्डर पर तैनात हैं दर्जनों टैंक दरअसल, यूक्रेन सामरिक तौर पर सोवियत यूनियन का सबसे अहम हिस्सा था, लेकिन सोवियत संघ के विघटन के साथ यूक्रेन आजाद हो गया और रूस के कई परमाणु संयंत्र भी उसके हिस्से में चले गए. लेकिन पुतिन का राज आने के बाद रूस ने यूक्रेन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.

Shia Mosque Suicide Bombing: यह घटना शुक्रवार, 6 फरवरी को हुई. अज्ञात हमलावर ने मस्जिद के गेट पर रोके जाने के बाद खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद के अंदर शीशे टूट गए. वहीं चारों ओर मलबा फैल गया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मस्जिद के फर्श पर खून से लथपथ शव दिखाई दिए.

M1A2T Abrams Battle Tanks: ताइवान अमेरिका से कुल 108 M1A2T टैंक खरीद रहा है. इस डील की कीमत करीब 40.5 अरब ताइवानी डॉलर बताई जा रही है. ये टैंक उन पुराने बख्तरबंद वाहनों की जगह लेंगे. जो पिछले 20 साल से ज्यादा समय से सेवा में हैं. इनका मकसद उत्तरी ताइवान की ग्राउंड डिफेंस क्षमता को मजबूत करना है. पहली खेप के 38 टैंक दिसंबर 2024 में ताइपे पोर्ट पहुंचे थे.

F-15K fighter jet: दक्षिण कोरिया की वायुसेना के F-15K फाइटर जेट्स को 4+ जेनरेशन स्तर तक आधुनिक बनाया जाएगा. बोइंग इन विमानों में नया एवियोनिक्स और मिशन सिस्टम आर्किटेक्चर लगाएगा. इसके तहत नया रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम, मिशन कंप्यूटर और नए कॉकपिट डिस्प्ले शामिल होंगे. इससे इन विमानों की सर्विस लाइफ भी बढ़ जाएगी.



