
VVPAT पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से EVM पर कितना भरोसा जगेगा विपक्ष का, 5 बिंदुओं में समझिए
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चुनाव आयोग ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद EVM पर अब किसी को शक नहीं रहना चाहिए. अब पुराने सवाल खत्म हो जाने चाहिए. सवालों से वोटर के मन में शक होता है. तो क्या अब राहुल गांधी मान लेंगे कि राजा की जान EVM से बाहर आ गई है?
कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन के अवसर पर मुंबई के शिवाजी पार्क में हुई सभा में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि राजा की आत्मा EVM, CBI, ED, इनकम टैक्स में है. पर अब सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम की वैधता पर मुहर लगा दी है. शुक्रवार को ईवीएम और VVPAT पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा मतलब है कि इस सिस्टम पर भरोसा करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि देश में बैलेट पेपर से वोटिंग का दौर वापस नहीं आएगा. यानी मतदान तो ईवीएम से ही होगा. इसके साथ ही VVPAT से 100 फीसदी पर्ची मिलान भी नहीं होगा.चुनाव आयोग ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब किसी को शक नहीं रहना चाहिए. अब पुराने सवाल खत्म हो जाने चाहिए. सवालों से वोटर के मन में शक होता है. तो क्या अब ईवीएम के आलोचक यह मान लेंगे कि राजा की जान ईवीएस से बाहर आ गई है?
1-सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम की सिक्युरिट की जो व्यवस्था दी है उस पर कितना भरोसा
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं ओर राजनीतिक दलों में विश्वास जगाने के लिए व्यवस्था दी है कि ईवीएम 45 दिनों तक सुरक्षित रहेगी और अगर नतीजों के बाद 7 दिनों के भीतर शिकायत की जाती है तो जांच कराई जाएगी.मतलब कि अगर प्रत्याशियों को लगता है कि कुछ गड़बड़ हुआ है तो ईवीएम की जांच की जा सकेगी. उम्मीद है कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के इस व्यवस्था से जरूर संतुष्ट होगा . फिर भी यह उम्मीद करनी बेमानी है कि आगामी लोकसभा चुनावों में हारने वाला यह नहीं कहेगा कि सरकार ने ईवीएम के जरिए बेइमानी की गई है. क्योंकि हर बार चुनावों में जो पार्टी हारती है वही ईवीएम पर संदेह करती रही है.
भारतीय जनता पार्टी ने भी 2009 में ईवीएम का विरोध किया था. तत्कालीन बीजेपी नेताओं ने देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी थी. पर शायद सभी दलों के मन मस्तिष्क में ईवीएम के प्रति भरोसा ही है कि आरोप लगाने वाले भी कभी इसके खिलाफ आंदोलित नहीं हुए और न ही चुनावों का बहिष्कार ही किया.सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद एडीआर की अर्जी पर बहस करने वाले प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि, चूंकि ईवीएम और VVPAT में ऐसे चिप्स लगे होते हैं जिन्हें अपने हिसाब से तैयार किया जाता है. इसलिए ऐसी आशंका रहती है कि वोटों में हेरफेर करने के लिए एक दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम लोड किया जा सकता है.
चूंकि मतदाताओं को ईवीएम पर भरोसा नहीं है, इसलिए हमने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि या तो बैलेट पेपर्स पर चुनाव के आदेश दें या मतदाता को मतपेटी में डालने के लिए वीवीपैट पर्ची दें और फिर VVPAT पर्चियों की गिनती करें. या वीवीपैट मशीन में लाइट चालू रखें और सभी पर्चियों की गिनती करें. आज सिर्फ 2 फीसदी VVPAT पर्चियों का ही ईवीएम से मिलान हो पाता है. सुप्रीम कोर्ट ने आज हमारी मांगों को खारिज कर दिया और इसके बजाय 3 निर्देश दिए 1- चुनाव आयोग को VVPAT पर बार कोड रखने की फीजीबिल्टी की जांच करनी चाहिए सभी पर्चियों की गिनती कंप्यूटराइज्ट तरीके से हो जाए 2-चुनाव के बाद चुनाव चिन्ह लोडिंग यूनिट को सील कर दिया जाना चाहिए और 45 दिनों तक उपलब्ध रखा जाना चाहिए 3- हारने वाले उम्मीदवार अपने खर्च पर किन्हीं 5 ईवीएम की 'बर्न मेमोरी' की जांच करा सकते हैं.
2-सुप्रीम कोर्ट के इन प्रावधानों से ईवीएम प्रणाली पर भरोसा जगने की उम्मीद

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