
'बार-बार कहा कि गैस ठिकानों को हाथ मत लगाना', ईरान के हमले से सदमे में कतर एनर्जी के CEO, ट्रंप को खूब सुनाया
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इजरायल ने इसी हफ्ते साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया. कतरएनर्जी के CEO साद अल-काबी ने बताया कि रास लाफान में हुए नुकसान को ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि कतर को खतरे का अंदाजा था.
इजरायल ने अमेरिका की मदद से बुधवार रात दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला कर ईरान को आगबबूला कर दिया. जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है. सरकारी तेल और गैस कंपनी कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) साद अल-काबी का कहना है कि उन्होंने लगातार इसे लेकर अमेरिका को चेताया था.
साउथ पार्स पर हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की रिफाइनरी के मुख्य ठिकाने मौजूद हैं. कतर की सरकारी गैस कंपनी के अनुसार, ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस आपूर्ति करने वाली दुनिया के सबसे बड़े गैस सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है.
इसके प्रमुख अल-काबी, जो देश के ऊर्जा मंत्री भी हैं, ने कहा कि ईरान के हमले से इतना नुकसान हुआ है जिसे ठीक करने में तीन से पांच साल का समय लग सकता है. अल-काबी ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों और एग्जीक्यूटिव्स को चेताया था कि अगर ईरान के तेल-गैस ठिकानों पर हमला होता है तो हमें ऐसे खतरे झेलने पड़ सकते हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा, 'मैं हमेशा चेतावनी देता रहा, हमारे साथ साझेदारी करने वाली तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों से बात करता रहा, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री से बात करता रहा, ताकि उन्हें इस नतीजे के बारे में आगाह कर सकूं और बता सकूं कि यह हमारे लिए नुकसानदेह हो सकता है.'
कतरएनर्जी के साझेदारों में एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी बड़ी अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां शामिल हैं.
कतरएनर्जी के प्रमुख को खतरे का अंदाजा था

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