
US को कौन याद दिलाएगा Trail of tears... जब विदेशियों ने 'सभ्य' बनाते-बनाते मरवा डाले 20 हजार 'नेटिव अमेरिकन'!
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ट्रेल ऑफ टियर्स (Trail of Tears) की 200 साल पुरानी कहानी अमेरिकी लालच और प्रपंच की मुनादी है. ब्रिटेन से नई दुनिया की तलाश में व्हाइट सेटलर्स जब अमेरिका आए तो उन्होंने यहां के मूल निवासियों (इंडियन) को 'असभ्य' और 'गंवार' से ज्यादा कुछ भी नहीं समझा. इन जनजातियों को कथित आधुनिक और शहरी बनाते बनाते अमेरिकी स्टेट ने जो बदमाशियां की वो इतिहास में 'आसुंओं की पगडंडियां' के नाम से रिकॉर्ड हो गईं. इसे कलमबद्ध किया है किसी और ने नहीं, बल्कि अमेरिकी इतिहासकारों ने ही. ये वो पगडंडियां है जहां पग-पग पर एक आदिवासी की अस्मिता अमेरिकी स्टेट से टकराती है.
अमेरिका की जो शानो-शौकत अभी है. इसके पास ताकत और डॉलर की जो गर्मी है. इसकी जो धौंस और चौधराहट है उसके पीछे 250 सालों के मुसलस्ल खूनी संघर्ष और टकराव का इतिहास है. वर्ना इसी अमेरिका में यहां के राष्ट्रपति अपनी निजी संपत्ति के तौर पर गुलामों का कुनबा रखा करते थे. हैरान न होइए अगर हम आपको बताते हैं कि यूएस के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन का जब निधन हुआ तो उनके पास जायदाद की लिस्ट में 300 दास थे. बतौर आदमी पैदा हुए ये वो लोग थे जिनके साथ आदमियत से कभी पेश नहीं आया गया. और इनकी कई नस्लें गुलामगीरी करते-करते अमेरिका में ही मर खप गईं.
अमेरिकियों ने ऐसा ही बर्बर आचरण अमेरिका के मूल निवासियों यानी कि 'इंडियन' के साथ किया. इंडियन सुनकर चौंकिए नहीं. दरअसल 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस स्पेन से भारत यानी कि इंडिया का समुद्री रास्ता पता लगाने निकले थे. लेकिन पहुंच गए अमेरिका. पर उस समय कोलंबस का मानना था कि वे इंडिया ही पहुंचे हैं.इसलिए उन्होंने वहां के मूल निवासियों को इंडियन कहना शुरू कर दिया. यही इंडियन शब्द यूरोप पहुंचा और अमेरिका की मूल जनजाति को दुनिया में नाम मिला इंडियन.
मानवाधिकार का लेक्चर देने वाले अमेरिका का अतीत एक राष्ट्र के रूप में अमेरिकन स्टेट की यात्रा इन इंडियन की एथनिक क्लींजिंग (समूल विनाश) से भरी हुई है. आज अमेरिका चुनाव की प्रक्रिया से गुजर रहा है. ये समय है अमेरिकी इतिहास के दस्तावेजों को पलटकर देखने का. जरा देखिए उस अमेरिका का अतीत जिसकी एजेंसियां दुनिया भर में मानवाधिकार का लेक्चर देती है, सांस्कृतिक स्वतंत्रता की दुहाई देकर संस्थाओं और राष्ट्रों पर बैन लगाती है.मगर अपने लिबास पर लगे कालिख को देखकर भी नजरअंदाज कर देती हैं. ट्रेल ऑफ टियर्स (Trail of Tears) इसी अमेरिकी हिपोक्रेसी की दास्तान है.
1830 में अमेरिकी संसद में एक कानून पास होता है. ये तत्कालीन राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन का प्रोजेक्ट था. नाम था- The Indian Removal Act. जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है इंडियन को हटाने वाला कानून. इस दमनकारी कानून का सहारा लेकर अमेरिका ने जॉर्जिया, टेनेसी, अल्बामा, नॉर्थ कैरोलिना और फ्लोरिडा में लाखों एकड़ जमीन पर पीढ़ियों से रहने वाले हजारों-लाखों नैटिव अमेरिकन को मिसीसिपी नदी के पश्चिम में धकेल दिया. इस सफर में हजारों लोग मौत का शिकार हुए और अमेरिका ने इनकी सदियों की पहचान, यादगार, संस्कृति और रीति-रिवाज दिन दहाड़े डकैती कर ली. अमेरिकी मूल निवासियों की इसी विस्थापन की विपदा की यात्रा को इतिहास में Trail of tears के नाम से जाना जाता है.
आपने जो किया है वो नरसंहार की श्रेणी में आता है
लेकिन तब न तो मानवाधिकार संगठन थे, न ही इंटरनेशनल कोर्ट और न ही कोई कर्मठ चौकीदार था जो अमेरिका की ओर उंगुली उठाकर कह सके कि आपने इन मूल निवासियों के साथ जो किया है वो जेनोसाइड (नरसंहार) की श्रेणी में आता है.

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