
UP-MP और बिहार विभाजन के 25 साल, जानिए तीन नए राज्यों की विकास यात्रा में कौन आगे निकला?
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25 साल पहले बने उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा बिल्कुल अलग निकली. उत्तराखंड ने UP को पीछे छोड़ा, बिहार झारखंड से आगे बढ़ा, जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ साथ-साथ बढ़े. कभी ‘बीमारू’ कहे जाने वाले राज्यों ने अब मजबूत विकास मॉडल बनाकर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में नई भूमिका स्थापित की.
25 साल पहले भारत के नक्शे पर तीन नए राज्यों-उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ का उदय हुआ था. बड़े राज्यों के प्रशासनिक बोझ, क्षेत्रीय असमानता और मजबूत स्थानीय पहचान की मांग के कारण यह विभाजन हुआ.
सवाल था कि क्या छोटे राज्य बेहतर विकास गति पकड़ेंगे? इन नए राज्यों से शासन और विकास में तेजी आने की उम्मीद थी. 25 साल बाद, मूल और विभाजित राज्यों ने विकास के मोर्चे पर एक-दूसरे के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया है, इस पर तुलनात्मक अध्ययन सामने आया है. तीनों ‘मूल’ और ‘नवगठित’ राज्यों की विकास कहानी बिल्कुल अलग दिखाई देती है.
उत्तर प्रदेश बनाम उत्तराखंड: पहाड़ ने रफ्तार पकड़ी विभाजन के बाद उत्तराखंड ने आर्थिक तरक्की में UP को पीछे छोड़ दिया. वित्त वर्ष में जहां कुल संयुक्त GDP में उत्तराखंड की हिस्सेदारी 7% थी, आज यह दोगुनी होकर 14% हो गई है, जबकि उत्तर प्रदेश का हिस्सा 93% से घटकर 86% रह गया है.
इसी तरह प्रति व्यक्ति आय 2005 के ₹24,726 से बढ़कर 2024 में ₹2.6 लाख पहुंच गई यानी 10.5 गुना की छलांग. भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, इसी अवधि में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 12,950 रुपये से 7.2 गुना बढ़कर 93,514 रुपये हो गई.
बिहार बनाम झारखंड: तस्वीर उलटी झारखंड का मामला उत्तराखंड के विपरीत है. दोनों राज्यों के संयुक्त नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में झारखंड की हिस्सेदारी घटी है. वित्त वर्ष 2000 में झारखंड का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 41 प्रतिशत हिस्सा था, जो वित्त वर्ष 2025 तक घटकर 32 प्रतिशत रह गया. इस बीच, अगर दोनों राज्यों को मिलाकर देखा जाए, तो इसी अवधि में बिहार की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई.
प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी, बिहार की आय वित्त वर्ष 2005 के 7,914 रुपये से 7.6 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 60,337 रुपये हो गई. झारखंड के लिए, इसी अवधि में यह 18,510 रुपये से 5.7 गुना बढ़कर 1.05 लाख रुपये हो गई.

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