
UP Elections Result 2022 : बुंदेलखंड की इन सीटों पर NOTA से भी कम वोट पाई कांग्रेस
AajTak
बुंदेलखंड कांग्रेस के लिए हमेशा कितना अहम रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने 2009 में इस क्षेत्र के लिए 7,200 करोड़ रुपये का एक विशेष पैकेज भी घोषित किया था.
एक दौर था जब बुंदेलखंड क्षेत्र में कांग्रेस की तूती बोला करती थी, लेकिन इस बार के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (UP Assembly Elections 2022) में भाजपा ने बुंदेलखंड की सीटों पर विपक्ष का लगभग सूपड़ा साफ कर दिया. वहीं कुछ सीटें ऐसी रही जहां कांग्रेस को NOTA से भी कम वोट मिले.
बुंदेलखंड क्षेत्र को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बनाने में सुशीला नायर का बड़ा योगदान माना जाता है. उन्हें लोग महात्मा गांधी की डॉक्टर के तौर पर भी जानते हैं. बुंदेलखंड की सबसे प्रमुख सीट झांसी से लोकसभा सांसद रहीं सुशीला नायर ने देश की स्वास्थ्य मंत्री का पद भी संभाला. कांग्रेस की ये विरासत बाद में सुजान सिंह बुंदेला, राजा बुंदेला और प्रदीप जैन आदित्य जैसे नेताओं को मिली.
बुंदेलखंड कांग्रेस के लिए हमेशा कितना अहम रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने 2009 में इस क्षेत्र के लिए 7,200 करोड़ रुपये का एक विशेष पैकेज भी घोषित किया था. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत ये हुई कि झांसी की चारों विधानसभा सीट पर जहां उसे मुंह की खानी पड़ी, वहीं बुंदेलखंड की कुछ सीटें तो ऐसी रही जहां उसे NOTA से भी कम वोट मिले...
मऊरानीपुर सीट झांसी जिले की मऊरानीपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भगवान दास को महज 3323 वोट मिले हैं, जबकि इस सीट से लोगों ने NOTA पर 3471 वोट डाले हैं. यहां से बीजेपी की सहयोगी अपना दल-सोनेलाल की प्रत्याशी रश्मि आर्या ने जीत हासिल की है. वो 58,595 वोट की लीड के साथ जीती हैं. उन्हें कुल 1,43,577 वोट मिले हैं. जबकि सपा प्रत्याशी तिलक चंद्र अहिरवार को 84,982 वोट हासिल हुए हैं. बसपा के रोहित रतन 32,641 वोट के साथ इस सीट पर तीसरे नंबर पर हैं.
बांदा सीट कालिंजर के लिए पहचान रखने वाली बांदा सीट पर कांग्रेस के लक्ष्मीनारायण को महज 1894 वोट मिले, जबकि NOTA पर 1991 वोट पड़े हैं. यहां से बीजेपी के प्रकाश द्विवेदी ने 15,214 वोट से जीत हासिल की है. प्रकाश द्विवेदी को 81,557 वोट मिले. जबकि सपा की मंजुला सिंह को 66,343 वोट मिले हैं. इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी के धीरज प्रकाश 38,284 वोट के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
बबेरू सीट बबेरू सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी गजेंद्र सिंह पटेल महज 2112 वोट हासिल कर सके, जबकि NOTA पर 3047 वोट डाले गए. इस सीट से सपा प्रत्याशी विशंभर सिंह यादव ने 7,393 वोट से जीत हासिल की है. विशंभर सिंह यादव को 79,614 वोट मिले हैं. जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के अजय कुमार को 72,221 वोट मिले हैं. इस सीट पर बसपा प्रत्याशी रामसेवक शुक्ला 37,009 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रही है.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








