
Som Pradosh Vrat 2022 Date: सोम प्रदोष व्रत आज, इस तरह करें भगवान शिव का पूजन, नोट करें लें शुभ मुहूर्त
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Som Pradosh Vrat 2022: सोम प्रदोष व्रत आज रखा जाएगा. प्रदोष व्रत को त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जाना जाता है. प्रदोष व्रत के दिन जो कोई व्रत रखता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है.
Som Pradosh Vrat 2022: सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत सबसे शुभ माना जाता है. प्रदोष व्रत को त्रयोदशी व्रत भी कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन जो कोई व्रत रखता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष. किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. आज 5 दिसंबर को सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर शनिवार के दिन किसी दंपत्ति को संतान सुख की कामना है तो प्रदोष व्रत करने से उन्हें जल्द संतान सुख की प्राप्ति होती है. वहीं बुधवार का प्रदोष व्रत सुख समृद्ध जीवन की कामना के लिए किया जाता है. स्कंद पुराण के अनुसार, आप चाहे कोई भी प्रदोष व्रत करें, आपको सच्चे मन से पूजा-पाठ करने और प्रदोष व्रत कथा सुनने से ही मनचाहे फलों की प्राप्ति होती है.
सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Som Pradosh Vrat Shubh Muhurat)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सोम प्रदोष व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाएगा. सोम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 05 दिसंबर 2022 को सुबह 05 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 06 दिसंबर 2022 को 06 बजकर 47 मिनट पर होगा.
सोम प्रदोष व्रत पूजन विधि (Som Pradosh vrat 2022 Pujan Vidhi)
प्रदोष व्रत करने के लिए सबसे पहले आप त्रयोदशी के दिन सूर्योदय से पहले उठ जाएं. स्नान करने के बाद आप साफ़ वस्त्र पहन लें. उसके बाद आप बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें. इस व्रत में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है. पूरे दिन का उपवास रखने के बाद सूर्यास्त से कुछ देर पहले दोबारा स्नान कर लें और सफ़ेद रंग का वस्त्र धारण करें. आप स्वच्छ जल या गंगा जल से पूजा स्थल को शुद्ध कर लें. अब आप गाय का गोबर ले और उसकी मदद से मंडप तैयार कर लें. पांच अलग-अलग रंगों की मदद से आप मंडप में रंगोली बना लें. पूजा की सारी तैयारी करने के बाद आप उतर-पूर्व दिशा में मुंह करके कुशा के आसन पर बैठ जाएं. भगवान शिव के मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करें और शिव को जल चढ़ाएं.

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