
'SIT नहीं कर रही है निष्पक्ष जांच...', प्रज्वल मामले में पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
AajTak
अपहरण के आरोपों का सामना कर रहे प्रज्वल रेवन्ना के पिता विधायक एचडी रेवन्ना के खिलाफ जांच के संबंध में भी सवाल उठाते हुए कुमारस्वामी ने पूछा कि जिस महिला का कथित तौर पर अपहरण किया गया था, उसे बचाए जाने के बाद अब तक अदालत में पेश क्यों नहीं किया गया है.
जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि हासन के सांसद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी "रास्ते से भटक रही है." इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन भी सौंपा. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा वह चाहते हैं कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिले, उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच की प्रगति पर सवाल उठाए.
एचडीकुमार स्वामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि मुझे हर रोज आप सभी को संबोधित करना पड़ रहा है. कुछ सरकारी अधिकारियों के निर्णय और आदेश संदिग्ध हैं. कृष्णा बायरे गौड़ा ने बहुत कुछ बोला है. ये सारी चर्चाएं शुरू होने से पहले, मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि मैं खुद को बचाने के लिए जाति का इस्तेमाल नहीं करूंगा. मैं अपनी सुरक्षा के लिए कभी नहीं कहूंगा कि मैं वोक्कालिगा हूं. 2006 में उन्होंने मुझ पर 150 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था. मैंने कभी भी अपने बचाव के लिए अपने विधायकों की ताकत का इस्तेमाल नहीं किया. मैंने उस दिन भी यह स्पष्ट कर दिया था. मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो भाग जाएगा. मैं कृष्णा बायरेगौड़ा को बताना चाहता हूं कि कानून से बड़ा कोई नहीं है. अगर किसी ने गलत किया है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी.'
अपहरण के आरोपों का सामना कर रहे प्रज्वल रेवन्ना के पिता विधायक एचडी रेवन्ना के खिलाफ जांच के संबंध में भी सवाल उठाते हुए कुमारस्वामी ने पूछा कि जिस महिला का कथित तौर पर अपहरण किया गया था, उसे बचाए जाने के बाद अब तक अदालत में पेश क्यों नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, "हमने राज्यपाल को ज्ञापन दिया कि कैसे जांच पटरी से उतर रही है, मैं पहले दिन से कह रहा हूं कि जिसने भी गलत किया है उसे सजा मिलनी ही चाहिए. जिस तरह से चीजें चल रही हैं, उसे देखते हुए यह ऐसा लगता है कि इनमें से कोई भी दोषी को सजा नहीं देना चाहता, बल्कि प्रचार चाहता है. जांच शुरू होने के बाद से अब तक क्या प्रगति हुई है?"
यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि अपहृत महिला के परिवार को यहां रखा गया है. उन्होंने सवाल किया कि महिला को अब तक अदालत में क्यों नहीं पेश किया गया. उन्होंने कहा कि "अपहृत महिला को यहां लाए हुए कितने दिन हो गए हैं? क्या उसका बयान सीआरपीसी की धारा 164 (मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए गए बयान) के तहत दर्ज किया गया है? क्या उसे न्यायाधीश के सामने पेश किया गया है? पांच दिन हो गए हैं, महिला को क्यों न्यायाधीश के सामने पेश नहीं किया गया? उसे कहां से लाया गया था? क्या उसे किसी फार्महाउस से लाया गया था जैसा कि मीडिया में दावा और रिपोर्ट किया गया है?''
"अदालत के सामने सच्चाई क्यों नहीं रखी गई? उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए सोमवार तक का समय मांगा है. इसका मतलब है कि वे रेवन्ना को तीन और दिनों के लिए जेल में रखना चाहते हैं. कांग्रेसी नेता अपनी नफरत को पूरा करना चाहते हैं, वे दोषियों के लिए सजा नहीं चाहते." "मुझे नहीं पता कि 4 जून (लोकसभा चुनाव परिणाम) के बाद मुद्दा ख़त्म हो जाएगा या नहीं."
रेवन्ना को बुधवार को यहां एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 14 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. एक महिला के अपहरण के कथित मामले में गिरफ्तार होने के बाद वह एसआईटी की हिरासत में थे. 33 साल के प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप है. इस मामले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है और सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस आपस में भिड़ गए हैं. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाने के सवाल पर कुमारस्वामी ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा, "हां, मैं निर्माता, निर्देशक हूं और मैं कहानी का मुख्य किरदार भी हूं. शिवकुमार चाहते हैं कि मैं कहानी का मुख्य किरदार बनूं." ठीक है? मुझे ख़ुशी है कि उन्होंने मुझे कहानी के नायक के रूप में स्वीकार कर लिया है."

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.

नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. हादसे के जिम्मेदार बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है. प्रशासन ने अब भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं.

महाराष्ट्र के ठाणे में तीन नाबालिग लड़कियों के लापता होने से सनसनी फैल गई. कल्याण के बारावे गांव से दो सगी बहनें और उनकी 13 साल की भांजी घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटीं. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. एक अहम सूचना के आधार पर पुलिस टीम को लखनऊ भेजा गया है, जहां लड़कियों की तलाश की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के रायपुर में मिड-डे मील योजना से जुड़े हजारों रसोइया और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर तूता मैदान में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. रसोइया संघ के अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है, जो उनके परिवार का खर्च चलाने के लिए अपर्याप्त है. ठंड के बावजूद वे 22 दिनों से धरना दे रहे हैं पर शासन के कोई प्रतिनिधि उनसे अब तक नहीं मिले हैं.

आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने चार शंकराचार्य पीठों की स्थापना की. उद्देश्य था हिंदू धर्म और दर्शन को बचाना और आगे बढ़ाना. ऐसा हुआ भी. लेकिन पिछली एक सदी में कई और शंकराचार्य पीठ गढ़ ली गईं. इन पर बैठने वालों में कलह आम हुई. चुनावी लाभ, उत्तराधिकार का झगड़ा, राजनीतिक हस्तक्षेप, और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने इस पद को धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक बना दिया है.





