
Sawan Somwar 2023: सावन का दूसरा सोमवार आज, शिव तांडव स्त्रोत समेत इन खास मंत्रों से करें शिव पूजा
AajTak
Sawan Somwar 2023: भगवान शिव और उनकी महिमा के बारे में पुराणों, धर्म ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में बहुत सी बातें लिखी और बताई गई हैं. ज्योतिष कहते हैं कि शिव की विशेष कृपा पाने के लिए अद्भुत फलदायी है शिव तांडव स्तोत्र का पाठ और उनके मंत्रों का जाप. आइए जानते हैं कि शिव तांडल स्तोत्र के पाठ की महिमा क्या है. साथ ही कौन से उनके खास मंत्र है.
Sawan Somwar 2023: आज सावन का दूसरा सोमवार है. मान्यताओं के अनुसार सावन का पवित्र महीना भगवान महादेव को अति प्रिय है. सावन के महीने सोमवार के व्रत से करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़े होते हैं. देवों के महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे उत्तम माना जाता है. इस माह में विधिपूर्वक शिव जी की आराधना करने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं. कहा जाता है कि सावन के इस महीने में कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कहते हैं कि जो व्यक्ति सावन में नियमित रूप से शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करते हैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. आज सोमवार को शिव तांडव स्त्रोत समेत कुछ खास मंत्रों के साथ पूजा करेंगे तो शिव की कृपा प्राप्त होगी.
क्या है शिव तांडव स्त्रोत?
शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव के परम भक्त रावण द्वारा की गई एक विशेष स्तुति है. यह स्तुति छन्दात्मक है और इसमें बहुत सारे अलंकार हैं. कहते हैं कि रावण जब कैलाश पर्वत लेकर चलने लगा तो शिवजी ने अंगूठे से कैलाश पर्वत को दबा दिया था. इससे रावण कैलाश पर्वत के नीचे दब गया. तब रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए जो स्तुति की थी, उसे शिव तांडव स्तोत्र कहा गया. जिस जगह रावण दबा था, उसे राक्षस ताल कहा जाने लगा.
शिव तांडव स्तोत्र पाठ के नियम
सुबह या प्रदोष काल में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना सर्वोत्तम होता है. पहले शिवजी को प्रणाम करें. उन्हें धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद गाकर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें. अगर नृत्य के साथ इसका पाठ करें तो सर्वोत्तम होगा. पाठ के बाद शिवजी का ध्यान करें और अपनी प्रार्थना करें.
सावन सोमवार व्रत के पूजन मंत्र

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










