
Russia-India Relation: रूस की वजह से ये भारतीय कंपनियां हो रहीं मालामाल
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रूस-यूक्रेन युद्ध से भारतीय रिफाइनरी तेल कंपनियों का भारी मुनाफा हुआ है. रूसी तेल पर पश्चिमी प्रतिबंध के बीच भारत ने रूस से तेल आयात काफी बढ़ा दिया है. रिलायंस जैसी तेल कंपनियां भारी मात्रा में रूस का कच्चा तेल खरीदकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक कीमतों पर बेच रही हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जहां दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है, वहीं भारत की बड़ी तेल कंपनियों का जैकपॉट लग गया है. भारत की तेल कंपनियां विश्व बाजार में सर्वोत्तम क्वालिटी का माने जाने वाले रूसी यूराल ईंधन तेल को भारी मात्रा में खरीद रही हैं और इसे एशिया और अफ्रीका के बाजारों में उच्च अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर बेच रही हैं. इस व्यापार में भारतीय तेल कंपनियों को भारी मुनाफा हो रहा है.
रूस-यूक्रेन युद्ध काफी लंबे समय से चल रहा है और ये जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा. हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों को इससे काफी लाभ हो रहा है.
रूस से भारत ने तेल खरीद में की है रिकॉर्ड बढ़ोतरी
भारत कभी रूसी तेल का बड़ा खरीददार नहीं रहा था. रूस से भारत में तेल आने में 45 दिनों से अधिक का समय लग जाता है. तेल का ये परिवहन भारत के लिए काफी महंगा पड़ता है. इसके उलट मध्य-पूर्व के देशों से तेल खरीद कर उसके परिवहन में भारत को काफी कम समय लगता है. इराक से भारत के पश्चिमी बंदरगाह तक तेल पहुंचने में मुश्किल से छह दिन लगते हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत रूस से अपनी जरूरत का केवल 2 % ईंधन तेल खरीदता था. फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद रूस से भारत का तेल खरीद शून्य हो गया. लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट हो गई है.
एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मई में 840,645 बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो अप्रैल में 388,666 बैरल प्रतिदिन था. पिछले साल मई में ये 136,774 बैरल प्रतिदिन था. जून में रूसी तेल का आयात 10 लाख 50 हजार बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान है.

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