
क्या ट्रंप अपनी जेब से देंगे 91000 करोड़ का फंड? 'बोर्ड ऑफ पीस' के लिए किया ऐलान लेकिन...
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नियंत्रण वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है. यह रकम इस साल UN को दिए जाने वाले अमेरिकी योगदान से 12 गुना ज्यादा है. फंडिंग की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को खुद के द्वारा स्थापित "बोर्ड ऑफ पीस" को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. यह राशि इस साल यूनाइटेड नेशन को अमेरिका की तरफ से मिलने वाले 767 मिलियन डॉलर से 12 गुना से ज्यादा है, लेकिन ट्रंप क्या ये फंडिंग अपनी जेब से देंगे?
ट्रंप ने बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह संस्था "बेहतर भविष्य बनाने का रास्ता दिखा रही है." उन्होंने कहा, "अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस को 10 अरब डॉलर यानी 91,045 करोड़ रुपये का योगदान देगा. युद्ध की लागत की तुलना में यह बहुत छोटी रकम है. यह केवल दो हफ्ते की लड़ाई के खर्च के बराबर है."
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हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी सरकार यह फंडिंग कैसे देगी. "बोर्ड ऑफ पीस" को ट्रंप और उनके प्रशासन ने एकतरफा तरीके से स्थापित किया है. इसे न तो कांग्रेस और न ही किसी अन्य विधायी निकाय से मंजूरी मिली है. आमतौर पर सरकारी फंड आवंटित करने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है.
क्या एकतरफा तरीके से सरकारी फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं ट्रंप?
डेमोक्रेट पार्टी के सीनेटर क्रिस मुर्फी ने कहा कि ट्रंप द्वारा एकतरफा तरीके से इस बोर्ड को सरकारी फंड देना "पूरी तरह अवैध" होगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर ऐसा कदम उठाया गया तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

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