
Premanand Maharaj: पहले से तय होती है अकाल मृत्यु? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब
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Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज ने अकाल मृत्यु पर बोलते हुए कहा कि जब व्यक्ति से महाअपराध हो जाता है, तब उसकी आयु क्षीण होने लगती है. आयु के क्षीण होते ही अकाल मृत्यु का योग बन जाता है.
जब किसी व्यक्ति की मृत्यु तय उम्र से पहले या अचानक हो जाती है, तो आम तौर पर उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है. ज्योतिष में ऐसी मृत्यु को अशुभ ग्रहों या पुराने कर्मों से जोड़कर देखा जाता है. कई लोग मानते हैं कि पितृ दोष या काल सर्प दोष भी इसका कारण हो सकते हैं. कुछ मान्यताओं के अनुसार राहु, केतु, शनि और मंगल के नकारात्मक प्रभाव को अकाल मृत्यु की मुख्य वजह माना जाता है. इसी कारण अकाल मृत्यु का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है. इस डर से बचने के लिए लोग पूजा-पाठ, व्रत और मंत्र जाप का सहारा लेते हैं.
अकाल मृत्यु को लेकर विश्वास
ऐसा विश्वास किया जाता है कि विशेष पूजा या मंत्र जाप से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है. इसी वजह से लोग महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं. इसके अलावा शिव जी और हनुमान जी की पूजा करने के साथ-साथ दान-पुण्य भी किया जाता है. अकाल मृत्यु को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं. इसी से जुड़ा एक सवाल एक व्यक्ति ने बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज से पूछा.
अकाल मृत्यु से जुड़ा सवाल
उस व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि क्या अकाल मृत्यु पहले से ही तय होती है? इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक पाप या महापाप करता है, तभी उसे अकाल मृत्यु का दंड मिलता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अकाल मृत्यु पहले से तय नहीं होती. प्रेमानंद महाराज के अनुसार जब किसी से बहुत बड़ा अपराध हो जाता है, तभी अकाल मृत्यु दंड के रूप में मिलती है. चाहे व्यक्ति को इसका पता हो या न हो, लेकिन अगर उससे कोई गंभीर अपराध हो गया हो, तो उसकी आयु कम हो जाती है.
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि कोई इसे जाने या न जाने, लेकिन यदि किसी से महाअपराध हो जाता है तो उसकी आयु क्षीण होने लगती है. आयु के क्षीण होते ही अकाल मृत्यु का योग बन जाता है और अंततः शरीर का त्याग हो जाता है.

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