
Pradosh Vrat 2022: ससुर के श्राप से चंद्र देव हो गए थे कुष्ठ रोगी, यहां पढ़ें प्रदोष व्रत की ये प्राचीन कथा
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Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत हर माह दो बार आता है. कृष्ण और शुक्ल पक्षों की त्रयोदशी तिथि को ये व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा होती है. प्राचीन कथा के अनुसार इस व्रत की शुरुआत चंद्र देव ने अपने ससुर के श्राप से मुक्ति पाने के लिए की थी. माघ मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को ये व्रत रखा जाएगा.
Pradosh Vrat: माघ मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी दिन रविवार को प्रदोष व्रत है. रविवार को होने की वजह से इसे रवि प्रदोष व्रत कहते हैं. शिवरात्रि के बाद भगवान शिव की पूजा के लिये प्रदोष व्रत सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बात का जिक्र शिव पुराण में भी किया गया है. इस व्रत के शुरू होने के पीछे की कहानी चंद्र देव से जुड़ी हुई है. चंद्र देव अपने ससुर के श्राप की वजह के कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए थे. ससुर के श्राप से मुक्ति पाने के लिए नारद मुनि के परामर्श पर चंद्र देव ने त्रयोदशी को प्रदोष पूजन किया था. यहां पढ़ें पूरी कथा...

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