
Parshuram jayanti 2021: जब भगवान राम पर क्रोधित हो गए थे परशुराम, जानें कई अनसुनी बातें
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हर साल अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है. परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं. वो रेणुका और सप्तर्षि जमदग्नि के पुत्र थे. वह द्वापर युग के अंतिम समय तक जीवित रहे थे.
हर साल अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है. परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं. वो रेणुका और सप्तर्षि जमदग्नि के पुत्र थे. वह द्वापर युग के अंतिम समय तक जीवित रहे थे. परशुराम को हिंदू धर्म के सात अमर लोगों में से एक माना जाता है. परशुराम ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी जिसके बाद उन्हें वरदान के रूप में एक फरसा मिला था. इसके जरिए परशुराम ने कई तरह की युद्ध कला सीखी. शक्तिशाली राजा कार्तवीर्य ने परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी थी. कहा जाता है कि इसका बदला परशुराम ने कार्तवीर्य के बाद इक्कीस बार क्षत्रियों का वध करके लिया था. उन्होंने महाभारत और रामायण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वो भीष्म, कर्ण और द्रोण के गुरु बने. परशुराम ने कोंकण और केरल की भूमि को बचाने के लिए कई समुद्री लड़ाइयां भी लड़ीं. भार्गव परशुराम के दादा एक महान ऋषि थे जिनका नाम ऋचीक था. परशुराम भारद्वाज गोत्र के कुल गुरु भी हैं. परशुराम भार्गव गोत्र के एक गौड़ ब्राह्मण से संबंध रखते हैं. कहा जाता है कि परशुराम के जन्म से पहले रेणुका ने चार पुत्रों को जन्म दिया जिनके नाम वासु, विश्व वासु, बृहुद्यानु और ब्रुतवाकांवा थे. अपने पांचवें पुत्र परशुराम के जन्म से पहले जमदग्नि ने दिव्य दृष्टि के लिए रेणुका झील (वर्तमान में हिमाचल में) के पास अपनी पत्नी रेणुका के साथ ध्यान किया. रेणुका पति के प्रति अपने समर्पण के लिए जानी जाती थीं.
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Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










