NRC मामले पर 17 अक्टूबर से सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ
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इस मामले में आने वाले फैसले जा असर निश्चित तौर पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर NRC पर पड़ेगा. पीठ ने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान भी विशिष्ट कार्य प्रक्रिया यानी SoP के मुताबिक ही सुनवाई होगी. यानी सुनवाई की प्रक्रिया जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जैसी ही होगी.
एनआरसी यानी संशोधित नागरिकता कानून की वैधता को चुनौती देने वाली अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट फाइनल सुनवाई करेगा. इन अर्जियों में संशोधित नागरिकता कानून की धारा 6 A की वैधता को चुनौती देती याचिकाओं पर 17 अक्टूबर से संविधान पीठ सुनवाई शुरू करेगी. इस संविधान पीठ की अगुआई सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे.
पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस जेबी पारदी वाला और जस्टिस मनोज मिश्रा होंगे. इस मामले में आने वाले फैसले जा असर निश्चित तौर पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर NRC पर पड़ेगा. पीठ ने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान भी विशिष्ट कार्य प्रक्रिया यानी SoP के मुताबिक ही सुनवाई होगी. यानी सुनवाई की प्रक्रिया जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जैसी ही होगी.
उस प्रक्रिया में एक नोडल काउंसिल को जिम्मेदारी दी गई थी जिन्होंने सभी पक्षकारों से उनकी मुख्य दलीलों और आधार को कंपाइल कर लिया था. इससे दलीलों और नजरिए के दोहराव से बचते हुए समय बचाया गया और मामले से जुड़े सभी आयाम भी अदालत के सामने पटल पर आ गए.
इसी दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकट रमणी ने कहा कि केस रिकॉर्ड इतने अधिक हैं की उनसे कंप्यूटर सिस्टम बैठ रहे हैं. इसके बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने आदेश पारित किया कि इस मुकदमे का शीर्षक बदल दिया जाए. इसे Re: section 6A सिटीजन शिप एक्ट 1955 नाम दिया गया है. कोर्ट में सुनवाई के केंद्र में इन याचिकाओं में फोकस सिटीजन शिप एक्ट की धारा 6A पर है जिसके मुताबिक 1जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच बांग्लादेश और म्यांमार सीमा से घुसपैठ कर भारत में दाखिल होकर असम में रह रहे लोगों को भारत का नागरिक माना जा रहा है.

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