
MP: ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहे कोरोना मरीज, हॉस्पिटल नहीं कर रहा एडमिट
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मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह चरमरा गई हैं. मरीज ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहे हैं. गंभीर बीमार मरीजों को हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से भर्ती नहीं किया जा रहा है.
मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े से तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार द्वारा खूब प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऑक्सीजन की किल्लत ने लोगों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. मध्य प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि हॉस्पिटल को दोगुनी मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है. 8 अप्रैल को 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई, तो वहीं 12 अप्रैल को 267 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई. हालांकि मांग बहुत अधिक है. वहीं भोपाल के एक अस्पताल ने तो पहले से ही ऑक्सीजन की किल्लत बताते हुए गंभीर रोगियों को भर्ती करना बंद कर दिया है.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

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