
MCD की दूसरे बैठक में भी हंगामे की आशंका, BJP बोली- अंतरआत्मा की आवाज पर बनेगा मेयर
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बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीन शंकर कपूर ने सदन की शपथ ग्रहण बैठक के लिए नियुक्त पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा का ध्यान 6 जनवरी की बैठक में हुए हंगामे और और विवाद का मुख्य कारण आम आदमी पार्टी के विधायकों को बताया. कपूर ने आरोप लगाया कि AAP ने पार्षदों को उकसाया था.
दिल्ली में नगर निगम चुनाव के बाद मेयर पद को लेकर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच घमासन छिड़ा है. 6 जनवरी को हंगामे की वजह से मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव आगे के लिए टल गए थे. अब नगर निगम की 24 जनवरी की दूसरी बैठक में हंगामे होने की आशंका फिर बढ़ गई है. जिसके मद्देनजर AAP और BJP ने अपने तरकश के तीर की धार तेज करनी शुरू कर दी है. सदन में आम आदमी पार्टी का बहुमत है और हर हालत में मेयर-डिप्टी मेयर अपना बनाने के लिए जोर लगा रही है तो उसकी नजर अब बीजेपी के गेम प्लान पर भी है.
दरअसल, दिल्ली बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का दावा है कि अंतरात्मा की आवाज पर पार्षद वोट करेंगे और मेयर बीजेपी का होगा. यानी साफ है कि निगम की 24 जनवरी को होने जा रही सदन की बैठक में हंगामे की आशंका है. AAP और BJP के सुर एक जैसे बने हुए हैं. बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीन शंकर कपूर ने मेयर-डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव के दिन पीठासीन अधिकारी से अपील की है. उन्होंने निगम की 24 जनवरी की बैठक के दौरान सभाकक्ष में शपथ ग्रहण के समय सिर्फ एल्डरमैन और पार्षदों को प्रवेश देने की मांग की है.
'सिर्फ एल्डरमैन और पार्षदों को प्रवेश दिया जाए'
बीजेपी प्रवक्ता कपूर ने सदन की शपथ ग्रहण बैठक के लिए नियुक्त पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा का ध्यान 6 जनवरी की बैठक में हुए हंगामे और और विवाद का मुख्य कारण आम आदमी पार्टी के विधायकों को बताया. कपूर ने आरोप लगाया कि AAP ने पार्षदों को उकसाया था. प्रवक्ता ने पीठासीन अधिकारी से कहा है कि वह नियमों का अध्ययन करें और यदि संभव हो तो निगम की 24 जनवरी की बैठक के दौरान सभाकक्ष में शपथ ग्रहण के समय सिर्फ एल्डरमैन और पार्षदों को प्रवेश दें. सांसदों और विधायकों को मेयर चुनाव के समय ही प्रवेश दिया जाए.
'AAP को बहुमत संख्या पर नहीं था विश्वास'
भाजपा प्रवक्ता ने कहा है कि आम आदमी पार्टी नगर निगम सदन में प्रत्यक्ष रूप से सबसे बड़ी पार्टी है, मगर 6 जनवरी को जिस तरह आम आदमी पार्टी के विधायकों ने हिंसा कराई, उससे साफ लगता है कि उन्हें अपनी बहुमत संख्या पर विश्वास नहीं था, इसलिये उन्होंने सदन की कार्यवाही बाधित कर मेयर चुनाव को टाल दिया.

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