
Lok Sabha Election 2024: मतदान केंद्रों पर शामियाना, पीने का पानी और पंखे... भीषण गर्मी और लू में वोटिंग के लिए EC की तैयारी
AajTak
देश में लोकसभा चुनाव के बीच भीषण गर्मी ने चुनाव आयोग की चिंता बढ़ा ही है. आम चुनाव के हर चरण से पहले गर्मी की स्थिति पर नजर रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने टास्क फोर्स का गठन किया है. इसके अलावा आयोग ने गर्मी और लू से निपटने के लिए बैठक भी की थी, जिसमें मतदाताओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले किए गए हैं.
भारत में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं और ऐसे में देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने चुनाव आयोग की चिंता बढ़ा दी है. लोकसभा चुनाव के आगामी चरणों के लिए मौसम विभाग ने सामान्य मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. वहीं आम चुनाव के हर चरण से पहले गर्मी की स्थिति पर नजर रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने टास्क फोर्स का गठन किया है. तेज गर्मी और लू की स्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने आईएमडी, एनडीएमए और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ सोमवार को बैठक की थी.गर्मी के बीच चुनाव आयोग की तैयारी बैठक में राजनीतिक दलों, सामाजिक सांस्कृतिक संस्थानों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, ताकि आगामी चुनाव में बढ़ रही गर्मी से लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े. इस बैठक में मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र और अन्य मौसम वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया था.
विशेषज्ञों के साथ हुई इस बैठक में आयोग ने इस विषय पर भी चर्चा की कि आखिर चुनावी मौसम में गर्मी के कारण घटते मतदान प्रतिशत के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं, ताकि बढ़ते तापमान और लू के झुलसाते थपेड़ों बीच मतदाताओं को सहूलियत प्रदान की जा सके और मतदान प्रतिशत पर भी कोई असर ना पड़े. मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने भरोसा जताया है कि वे जनता के साथ ही राष्ट्र और प्रदेश स्तर पर निर्वाचन आयोग को भी मौसम का पूर्वानुमान जारी कर रहे हैं और इस बाबत लगातार निर्वाचन आयोग के संपर्क में हैं. इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, (एमओएचएफडब्ल्यू) के अपर सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के विभाग प्रमुख और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक ने भी हिस्सा लिया था.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि 26 अप्रैल को होने वाले आम चुनाव के दूसरे चरण में गर्मी की लहर को लेकर कोई बड़ी चिंता करने की जरूरत नहीं है. वहीं दूसरे चरण के मतदान वाले 13 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में मौसम सामान्य रहने का पूर्वानुमान जताया गया है. इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और हीटवेव की स्थितियों को देखते हुए और गर्मी के मौसम के कारण किसी भी जोखिम को कम करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए आयोग ने आज संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक की थी.
इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार और श्री सुखबीर सिंह संधू के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के अपर सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के विभाग प्रमुख और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक ने भाग लिया था.
इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि जरूरत पड़ने पर सभी विभाग के अधिकारियों का एक कार्य बल मौसम में किसी भी प्रकार के बदलाव और शमन उपायों के लिए मतदान के प्रत्येक चरण से पांच दिन पहले गर्मी की लहर व आर्द्रता के प्रभाव की समीक्षा करेगा. वहीं आयोग ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह राज्यों में स्वास्थ्य अधिकारियों को जरूरी हिदायत दे कि वे चुनावी प्रक्रिया और मतदान को प्रभावित करने वाली हर स्थिति से निपटने के लिए साझा तैयारी रखें. मतदाताओं को मिलेंगी ये सुविधाएं इसके अलावा आयोग 16 मार्च 2024 को जारी अपनी सलाह के अनुसार मतदान केन्द्रों पर शामियाना, पीने के पानी, पंखे और अन्य आवश्यक न्यूनतम सुविधाओं आदि सहित पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सीईओ के साथ अलग से समीक्षा करेगा. वहीं मतदान केन्द्र क्षेत्रों में गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए एहतियाती उपायों (क्या करें और क्या न करें) के लिए जनता के बीच आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां की जाएंगी.
बता दें कि आयोग मौसम की खबरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और मतदान कर्मियों, सुरक्षा बलों, उम्मीदवारों और राजनीतिक दल के नेताओं के साथ-साथ मतदाताओं की सुविधा एवं हितों को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है.

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.






