
Lata Mangeshkar: तुम मुझे यूं भुला न पाओगे.... अपने गीतों के जरिए सदा अमर रहेंगी लता!
AajTak
आज संगीत की दुनिया उजड़ी हुई सी लग रही है, संगीत के संसार में दर्द का एक थक्का गुजरा है, शूल बनकर चुभा है ये वाक्य, कि नहीं रहीं लता मंगेशकर. ये सिर्फ लता मंगेशकर का जाना नहीं है, ये अवसान है एक सदी का, लता ताई, जो टूटी तमन्नाओं की खुरदुरी जमीन पर अपने गीतों के जरिए मखमली जज़्बात रच देती थीं, उनकी आवाज़ कानों में गूंज रही है, मानों वो खुद कह रही हैंकि तुम मुझे यूं भुला न पाओगे. लता न होतीं तो रूपहले पर्दे के इश्क में इतना आकर्षण न होता, लता न होंती तो फिल्मी दुनिया में हुस्न की इतनी दीवानगी न होती लेकिन सब कुछ छोड़कर अनंत में विलीन हो गईं ममतामयी लता मंगेशकर. देखें स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जीवन पर आधारित ये वीडियो.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









