
Janmashtami 2022: कब और कैसे हुई थी श्रीकृष्ण की मृत्यु? जानें ये रहस्य
AajTak
Shri Krishna Janmashtami 2022 Kab Hai: भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. लेकिन क्या आप जानते हैं श्रीकृष्ण की मौत कब और कैसे हुई थी. क्या आप जानते हैं श्री कृष्ण का मौत किसके हाथों हुई थी. आइए जानते हैं इसे लेकर हिंदू धर्म की पौराणिक कथाएं क्या कहती हैं.
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. ऐसी मान्यताएं हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. लेकिन क्या आप जानते हैं श्रीकृष्ण की मौत कब और कैसे हुई थी. आइए जानते हैं इसे लेकर हिंदू धर्म की पौराणिक कथाएं क्या कहती हैं.
मानव जाति और मानवता को नष्ट करने वाला कुरुक्षेत्र का युद्ध शांत हो चुका था. अपनी जीत से पांडव बहुत खुश नहीं थे. इस तबाही से उनका मन भी कहीं न कहीं विचलित था. इसलिए पांडव श्रीकृष्ण के साथ दुर्योधन की मौत पर शोक जताने उनके अंधे मां-बाप गांधारी और धृतराष्ट्र के पास पहुंचे. दुर्योधन का शव खून में लथपथ पड़ा था. गांधारी ने तब श्रीकृष्ण को दुर्योधन की मौत का असली जिम्मेवार ठहराया था.
गांधारी ने चीखते हुए श्रीकृष्ण से कहा, 'हे द्वारकाधीश! मैंने हमेशा आपकी पूजा विष्णु अवतार मानकर की. लेकिन क्या आज आप अपने किए पर जरा भी शर्मिंदा हैं? अपनी दिव्य शक्तियों से आप ये युद्ध रोक भी सकते थे. जाओ जाकर देवकी से पूछो कि बेटे की मौत पर आंसू बहाने वाली मां का दर्द क्या होता है, जिसने अपनी सात संतानों को मरते देखा है.'
गांधारी का श्राप गांधारी यहीं शांत नहीं हुई. उन्होंने श्रीकृष्ण को श्राप देते हुए कहा, 'यदि भगवान विष्णु के प्रति मेरी श्रद्धा और भक्ति सच्ची है तो आज से ठीक 36 साल बाद धरती पर तुम्हारा भी अंत हो जाएगा. द्वारका नगरी तबाह हो जाएगी और यदुवंश का नामोनिशान मिट जाएगा. इस कुल के लोग एक दूसरे के ही खून के प्यासे हो जाएंगे.'
कहते हैं कि गांधारी का यही श्राप आगे चलकर यदुवंश के सर्वनाश और श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण बना. कई साल बीतने के बाद श्रीकृष्ण के पुत्र सांबा गर्भवती स्त्री का वेष धारण कर ऋषि-मुनियों के पास गए. ये देखकर ऋषि भड़क गए और उन्होंने सांबा को श्राप दिया कि वो एक ऐसे लोहे के तीर को जन्म देगा जिससे उसका कुल-साम्राज्य खत्म हो जाएगा. सांबा घबरा गया और उसने इस घटना के बारे में उग्रसेन को बताया.
इस श्राप से सांबा को बचाने के लिए उग्रसेन ने कहा कि वो एक तीर का चूर्ण बनाकर उसे प्रभास नदी में प्रवाहित कर दे. ऐसा करने से वो श्रापमुक्त हो जाएगा. ऐसा कहते हैं कि जिस तट पर इस चूर्ण को जमा किया गया था वहां एक खास तरह की घास उग आई. ये कोई साधारण घास नहीं थी, बल्कि एक नशीली घास थी. इसके बाद द्वारका में कुछ अशुभ संकेत दिखने लगे. श्रीकृष्ण का शंख, रथ, सुदर्शन चक्र और बलराम का हल अदृश्य हो गया.

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










