
IPC Section 26: जानिए, क्या है आईपीसी की धारा 26?
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IPC में कानून व्यवस्था (Law and order), अपराध (Crime) और सजा (Punishment) से जुड़े प्रावधान (Provisions) मिलते हैं. आईपीसी (IPC) की धारा 26 का संबंध 'विश्वास' से है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 26 (Section 26) क्या है?
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में कानून व्यवस्था (Law and order), अपराध (Crime) और सजा (Punishment) से जुड़े प्रावधान (Provisions) मिलते हैं. आईपीसी (IPC) की धारा 26 का संबंध 'विश्वास' से है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 26 (Section 26) क्या है?
आईपीसी की धारा 26 (IPC Section 26) भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 26 (Section 26) का संबंध 'विश्वास करने की वजह' (Reason to believe) से है. धारा 26 के मुताबिक 'कोई शख्स किसी बात के विश्वास (Believe) करने की वजह (Reason) रखता है, यह तब कहा जाता है, जब वह उस बात के विश्वास करने की पर्याप्त वजह (Sufficient Cause) रखता है, अन्यथा नहीं.'
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क्या है आईपीसी (IPC) भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा और दंड का प्रावधान करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC ब्रिटिश कालीन भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिश पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.
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