
International Yoga Day 2021: योग और नमाज में कितनी समानता? दोनों शब्दों के मायने भी दिलचस्प
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योग और नमाज में काफी हद तक समानताएं नजर आती हैं. योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'युजा' से हुई है जिसका मतलब है 'एकजुटता'. ठीक इसी तरह नमाज जिसे 'सलात' कहा जाता है, इसकी उत्पत्ति हुई है अरबी शब्द 'सिला/विसाल' से. इसका भी मतलब 'एकजुटता' से ही है. नमाज के दौरान मन को शांत रखा जाता है और ध्यान लगाया जाता है. योग में भी मन को शांत कर ध्यान लगाया जाता है.
पूरी दुनिया में आज सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. कुछ मुस्लिम देशों में भी इसको लेकर आयोजन होते रहे हैं. हालांकि धर्म विशेष का बताकर इसकी आलोचना भी हुई है. खासकर योग से मुस्लिम समाज के एक तबके का परहेज सामने आ चुका है. जबकि मिस्र ने 'योग' को इस्लामी व्यायाम करार दिया था. वैसे करीब 1400 साल पहले इस्लाम में नमाज के रूप में इंसान को फिट रखने का फॉर्मूला दिया गया है. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि नमाज और योग एक-दूसरे के पूरक भी हैं. दरअसल, नमाज अदा करने की पूरी प्रक्रिया को अगर बारीकी से देखें तो योग और नमाज में काफी हद तक समानताएं नजर आती हैं. योग और नमाज दोनों के साइंटिफिक फायदे तो हैं ही. इस बारे में मौलानाओं का मानना है कि नमाज अल्लाह की इबादत है, योग नहीं. लेकिन दोनों के फायदे हैं. नमाज में जो प्रक्रियाएं हैं, उसे ध्यान से देखने पर पता चलता है कि नमाज सेहत के लिए कितनी मुफीद है. योग तो व्यक्ति पूरे दिन में एक बार करता है, जबकि नमाज दिन में पांच बार है. सुबह सूरज निकलने के पहले से लेकर डूबने और सोने से पहले तक नमाज पढ़ी जाती है.More Related News

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