
Happy Makar Sankranti 2022: 'मीठे गुड़ से मिल गया तिल, उड़ी पतंग और खिल गया दिल', मकर संक्रांति पर दोस्तों को भेजें ये संदेश
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Makar Sankranti 2022 Messages: मकर संक्रांति का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस दिन लोगों को नए अन्न की खिचड़ी बनाकर खानी चाहिए. मकर संक्रांति के दिन लोग एक-दूसरे को इस त्योहार की बधाई भी देते हैं. अब जब कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं तो ऐसे में आप मैसेज के जरिए से एक-दूसरे को मकर संक्रांति त्योहार की बधाई दे सकते हैं.
Makar sankranti 2022 wishes: जनवरी महीने की शुरुआत से ही लोगों को मकर संक्रांति त्योहार का बेसब्री से इंतजार रहता है. हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है और करोड़ों की संख्या में हिंदू धर्म के लोग इस त्योहार को मनाते हैं. मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके लोटे में लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. सूर्य के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए और फिर नए अन्न की खिचड़ी बनाकर खानी चाहिए. लोग एक-दूसरे को इस त्योहार की बधाई भी देते हैं. अब जब कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से तेजी से देश में बढ़ने लगे हैं और तमाम तरह की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं, तो ऐसे में आप मैसेज के जरिए से एक-दूसरे को मकर संक्रांति त्योहार की बधाई दे सकते हैं.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

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उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

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