
Crime Katha: सूरजभान, राजन तिवारी, सोनू-मोनू और टाल का गुट... लंबी है अनंत सिंह के जानी दुश्मनों की लिस्ट
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मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह की दुश्मनी सूरजभान सिंह, राजन तिवारी, सोनू-मोनू और टाल गैंग से दशकों पुरानी है. सत्ता, जमीन और वर्चस्व की इस जंग ने गंगा के किनारे पर बसे मोकामा को गैंगवार का अड्डा बना दिया. जानिए इन कुख्यात गुटों और अनंत सिंह की रंजिश की पूरी कहानी.
Crime Katha of Bihar: मोकामा, बिहार का एक ऐसा इलाका जो कभी उद्योगों की चमक से जगमगाता था, लेकिन आज ये इलाका अपराध और बदले की राजनीति के काले साए में डूबा है. एक वक्त था, जब खासकर टाल इलाका दलहन की खेती के लिए मशहूर था, लेकिन 1980 के दशक से वहां गैंगवार ने जड़ें जमा लीं. अनंत सिंह जैसे बाहुबली ने अपनी ताकत से उस इलाके पर कब्जा किया, लेकिन दुश्मनों की फौज ने कभी उसे सुकून से रहने नहीं दिया.
कुख्यात अनंत सिंह के दुश्मनों की लिस्ट में शुमार सूरजभान सिंह, राजन तिवारी और सोनू-मोनू जैसे नाम आज भी दहशत फैलाते हैं. यह कहानी है सत्ता, जमीन और बदले की. जहां हर गली में बंदूक की आवाज गूंजती है. टाल के गुट ने अनंत सिंह के वर्चस्व को चुनौती दी, और इसी दुश्मनी में खून की नदियां बहाईं गईं. आज भी मोकामा की सियासत इन्हीं रंजिशों पर टिकी है.
अनंत सिंह - छोटे सरकार का उदय अनंत सिंह को 'छोटे सरकार' कहा जाता है. उसका जन्म 1961 में मोकामा के लदमा गांव में रहने वाले एक गरीब परिवार में हुआ था. जिस उम्र में बच्चे खेल कूद में बिजी रहते हैं, उस छोटी सी उम्र में ही अनंत सिंह ने पहली हत्या की थी. साल 1990 के दशक तक उसका नाम अपहरण, वसूली और हत्या के कई मामलों में आ चुका था. उसका बड़ा भाई दिलीप सिंह 'बड़े सरकार' के नाम से मशहूर था, जो 1990 और 1995 में जनता दल से विधायक बना.
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राजनीति में एंट्री अनंत सिंह ने साल 2005 के दौरान राजनीति में कदम रखा, जब जदयू ने उसे अपना उम्मीदवार बनाया और चुनाव में उसने पहली बार मोकामा से जीत हासिल की. उसके खिलाफ 38 से ज्यादा आपराधिक मामले हैं, लेकिन वोटरों के बीच वो हीरो है. वो जेल में रहते हुए भी चुनाव जीत चुका है, और उसकी पत्नी नीलम देवी ने साल 2022 में सीट बचाई. अनंत का दबदबा टाल क्षेत्र तक फैला था, लेकिन दुश्मनों ने उसे कभी अकेला नहीं छोड़ा.
सूरजभान सिंह: दादा की दहशत सूरजभान सिंह एक ऐसा बाहुबली है, जिसे लोग 'दादा' कहते हैं. उसका जन्म 1965 में मोकामा के एक किसान परिवार में हुआ था. गरीबी से निकलकर वह रेलवे के ठेकों पर कब्जा करने वाला डॉन बन गया. उसके खिलाफ 26 आपराधिक मामले हैं, जिनमें 1992 की एक हत्या और 1998 में पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या का केस भी शामिल है.

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