
Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को लगाएं पीले रंग के ये 6 भोग, चमकेगी किस्मत
AajTak
ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती जिस पर प्रसन्न हो जाती हैं, उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर सफलता और मान-सम्मान प्राप्त होता है. अगर किसी की कुंडली में विद्या का योग नहीं है या उनका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगता तो बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की उपासना विशेष फलदायी हो सकती है.
Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी का पर्व पारंपरिक रूप से बच्चों की शिक्षा के लिए काफी शुभ माना गया है. इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन बच्चों की पढाई-लिखाई का श्रीगणेश किया जाता है. ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती जिस पर प्रसन्न हो जाती हैं, उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर सफलता और मान-सम्मान प्राप्त होता है. अगर किसी की कुंडली में विद्या का योग नहीं है या उनका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगता तो बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की उपासना विशेष फलदायी हो सकती है.
इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 26 जनवरी दिन गुरुवार यानी आज है. कहते हैं कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीले रंग का भोग लगाने से हर समस्या का अंत हो सकता है. आइए आपको छह तरह के पीले भोग और उसके प्रभाव से दूर होने वाली समस्याओं के बारे में बताते हैं.
बेसन के लड्डू- इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार गुरुवार के दिन है. ऐसे में आप पूजा के दौरान मां सरस्वती को बेसन के लड्डू का भोग लगा सकते हैं. इस प्रसाद के चढ़ावे से न केवल सरस्वती बल्कि देवगुरु बृहस्पति और श्री हरि भगवान विष्णु भी प्रसन्न हो जाते हैं. इस एक भोग से विवाह में आ रही समस्या और वाणी दोष दूर हो सकता है.
पीले मीठे चावल- बसंत पंचमी पर आप माता सरस्वती को पीले रंग के मीठे चावल का भी भोग लगा सकते हैं. इसे केसर भात भी कहा जाता है. केसर भात के भोग से देवी सरस्वती बहुत प्रसन्न होती हैं. ऐसा कहते हैं कि देवी को केसर भात का भोग लगाने से जीवन में सकारात्मत ऊर्जा का संचार होता है.
केसर हलवा- मां सरस्वती को केसर का हलवा भी बहुत पसंद है. सरस्वती पूजा में केसर हलवा एक पारंपरिक भोग के रूप में चढ़ाया जाता है. देवी सरस्वती को यह एक भोग लगाकर आप जीवन के हर कष्ट से मुक्ति पा सकते हैं. इससे आपके परिवार में भी सुख-समृद्धि बनी रहेगी.
बूंदी- बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती को बूंदी का भोग भी जरूर लगाना चाहिए. देवी को बूंदी के प्रसाद का भोग लगाने के बाद इसे श्रद्धालुओं में वितरित करने से भाग्योदय होता है. ऐसी मान्यताएं हैं कि इस प्रसाद के भोग से मां सरस्वती साधक से प्रसन्न होती है और बुद्धि का विकास करती है.

Shaddi-Vivah Shubh Muhurat 2026: साल 2026 उन लोगों के लिए खास रहने वाला है जो विवाह की तैयारी में हैं. देवशयनी एकादशी से पहले कई महीनों तक लगातार शुभ मुहूर्त मिलेंगे, वहीं चातुर्मास के बाद देवउठनी एकादशी से फिर से विवाह का शुभ दौर शुरू होगा. तो आइए जानते हैं कि साल 2026 शादी-विवाह के लिए कितने मुहूर्त रहने वाले हैं.












