
Ayodhya: रामलला की बनती हुई मूर्ति को रोज शाम 4-5 बजे देखने आते थे 'हनुमान जी', अरुण योगीराज ने सुनाए चमत्कारिक किस्से
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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर के लिए रामलला की छवि को गढ़ने वाले शिल्पकार अरुण योगी ने बताया कि प्रभु श्री राम को की मूर्ति को आकार देने में उनकी स्वयं भगवान राम ने ही मदद की, क्योंकि जब मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा अर्चना हुई तब सहसा उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ कि उसे उन्होंने बनाया था.
Arun Yogiraj Interview: अयोध्या के राम मंदिर के लिए रामलला की मूर्ति बनाने वाले अरुण योगीराज का बड़े-बड़े खुलासे किए हैं. मूर्ति को आकार देने के 7 महीनों में योगीराज ने तमाम चमत्कारिक घटनाएं और कुछ ऐसे अनुभव साझा किए हैं कि हर कोई हैरानी जता सकता है.
दरअसल, अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यजमानी में हुए धार्मिक समारोह के बाद रामभक्तों का सैलाब 'बालकराम' की अद्भुव छवि को निहारने राम मंदिर में उमड़ रहा है. प्रभु की इस छवि को गढ़ने वाले शिल्पकार अरुण योगी ने बताया कि रामलला की मूर्ति को आकार देने में उनकी स्वयं भगवान राम ने ही मदद की, क्योंकि जब मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा अर्चना हुई तब सहसा उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ कि उसे उन्होंने बनाया था. पूजा के दौरान रामलला की प्रतिमा पहले से कहीं ज्यादा दिव्य और लौकिक हो गई.
कर्नाटक के रहने वाले शिल्पकार अरुण योगी राज ने एक ईश्वरीय किस्सा बताया. कहा कि जब वह मूर्ति तराशने का काम करते थे, तब हर दिन शाम 4 से 5 बजे एक बंदर आ जाता था. फिर कुछ ठंड के कारण हमने कार्यशाला को तिरपाल से ढक दिया तो वो बंदर बाहर आया और जोर-जोर से खटखटाने लगता था. ये बंदर हर रोज शाम 4-5 बजे के बीच आ जाता था. शायद वह बंदर हनुमान जी ही थे, जिनका प्रभु श्री राम को देखने को मन हो. मैंने ये बात चंपत राय (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव ) जी को भी बताई थी.
यही नहीं, 7 महीने से चल रही नक्काशी के दौरान शिल्पकार अरुण योगीराज तमाम किस्सों और आश्चर्य से गुजरे. अरुण कहते हैं, मैं 7 महीने तक ठीक से सो नहीं पाया. सोने के बाद भी प्रभु के दर्शन होते थे.
वहीं, सैकड़ों मूर्तियों को आकार देने वाले अरुण योगीराज रामलला के चेहरे और नेत्रों को रूप देने के पहले काफी सशंकित भी थे, क्योंकि उनका मानना था कि यह मूर्ति पूरे देश और दुनिया के लिए पूजनीय होगी. ऐसे में बालकराम के मुख को आकार देने को लेकर मन में थोड़ा था भय भी था, लेकिन अचानक दीपावली के समय उन्होंने अयोध्या में प्रभु राम का रूप धरकर आए बालकों को देखा और वहीं से भगवान के बालक स्वरूप को गढ़ दिया और सामने आया- चमकता आभामंडल, दिव्य दृष्टि और मुस्कुराता हुआ मुख.

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