
Akshaya Tritiya Gold Buying Tips: अक्षय तृतीया पर खरीदना है सोना या हीरा? नुकसान से बचाएंगी ये 6 बातें
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सोना हो या हीरा या इनसे बने गहने, इन्हें खरीदते समय कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है. अगर गहनों की खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो भारी नुकसान से बचा जा सकता है.
भारत में मंगलवार को एक साथ ईद (Eid) और अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) का त्योहार मनाया जा रहा है. अक्षय तृतीया के मौके पर सोना, हीरा या गहने खरीदने की परंपरा रही है. यह परंपरा अब ट्रेंड और फैशन का रूप ले चुकी है. अक्षय तृतीया अब एक तरह से लोगों का त्योहार नहीं बल्कि कॉरपोरेट उत्सव का रूप ले चुका है. हालांकि सोना हो या हीरा या इनसे बने गहने, इन्हें खरीदते समय कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है.
अगर गहनों की खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो भारी नुकसान से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं कि वे कौन सी बातें हैं, जिनका ध्यान रखकर इस अक्षय तृतीया के अवसर पर आप अपना बड़ा नुकसान बचा सकते हैं.
1. बिल में जरूर डलवाएं हॉलमार्क का नंबर
कीमती धातुओं और गहनों व नगीनों के कारोबारी आशीष सोनी बताते हैं कि कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर लोग लाखों के नुकसान से बच सकते हैं. वह कहते हैं कि सोना या सोने के गहने खरीदने से पहले हॉलमार्क जरूर चेक करना चाहिए. हॉलमार्क से सोने की शुद्धता का पता चलता है. इसके तहत अमूमन 18 कैरेट से 22 कैरेट तक की ज्वेलरी बिकती है. 22 कैरेट में 92% सोना और 18 कैरेट में 75% प्रतिशत सोना होता है. 24 कैरेट विशुद्ध सोना होता है, जो इतना लचीला होता है कि गहने ही ना बन पाएं. सही आकार देने के लिए सोने में चांदी, तांबा और अन्य धातुओं की मिलावट जरूरी होती है. आशीष कहते हैं कि सोने के गहने, गिन्नी, सिक्के या बिस्किट खरीदने से पहले यह चेक करना चाहिए कि उस पर सही हॉलमार्क है या नहीं. इसके साथ ही हॉलमार्क की उस संख्या को बिल में जरूर लिखवाना चाहिए. हर ज्वेलरी का एक यूनिक HUID नंबर होता है, जो BIS के आगे लिखा होता है. इससे इस बात की श्योरिटी हो जाती है कि आपने सोना जहां से भी लिया है, वह उसे फिर से खरीद लेगा.
2. गहनों में भरे मोम से होता है इतना नुकसान
आशीष के अनुसार, ग्राहकों को सबसे ज्यादा नुकसान गहने में भरे गए मोम और चपड़ी के कारण होता है. जब ग्राहक गहने खरीदता है तो वह इन मिलावटी चीजों को भी सोने के भाव में ले आता है और जब वह बेचने जाता है तो ज्वेलर इन्हें हटाकर दाम लगाते हैं. उन्होंने कहा कि हार, मंगलसूत्र आदि में सोने के दाने, घुंघरू या फुलावट के डिजाइन भी होते हैं. उनमें चपडी या मोम भरा हुआ होता है. इस बारे में दुकानदार तभी बताता है, जब उससे पूछा जाता है कि उन दानों के अंदर कितना मोम है. चूंकि भरे हुए मोम या चपड़े का वजन नहीं किया जा सकता, इस कारण आपको गहने बदलवाने या वापस बेचते समय 10% से 30 फीसद तक का नुकसान हो सकता है. सोने की ज्वेलरी में 10 से 30% तक मोम हो सकता है, जिसे हम सोने के दाम में खरीद कर लाते हैं.

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