
82 साल के रिटायर प्रोफेसर के साथ 90 लाख की ठगी, बुजुर्गों को ही निशाना बनाता था आरोपी
AajTak
शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की और आरोपी की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की. पुलिस ने सोमवार को रेड डाली और आरोपी वीरेंद्र साहनी को गिरफ्तार कर लिया. साहनी ने पुलिस को बताया कि वह एक बीमा डेटा कलेक्शन कॉल सेंटर में काम कर रहा था और 2015 में उसने अपने 2-3 सहयोगियों की मदद से कॉल सेंटर खोलकर ग्राहकों से संपर्क करना शुरू किया.
दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में एक 32 साल के युवक को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, युवक पर बीमा पॉलिसियों की मैच्योरिटी पर 10 गुना बोनस दिलाने के बहाने बुजुर्ग को ठगने का आरोप है. आरोपी की पहचान वीरेंद्र साहनी के तौर पर हुई है. वह ग्रेटर कैलाश का रहने वाला है.
पुलिस के मुताबिक, 27 जून को 82 साल के रिटायर प्रोफेसर ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने अपनी शिकायत में दावा किया था उनसे 2019 में एक शख्स ने संपर्क किया था. उसने उन्हें खुद को आरबीआई लखनई डीजीएम संदीप त्यागी बताया था. शख्स ने रिटायर प्रोफेसर से कहा था कि उनकी पॉलिसियों की मैच्योरिटी हो गई है. उन्हें बदले में 90 लाख रुपए मिलने हैं. इसके बाद शख्स ने प्रोफेसर से प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में 1.5 लाख रुपए का भुगतान करने को कहा. पुलिस के मुताबिक, प्रोफेसर ने शख्स की बात मान ली. इसके बाद से वह शख्स लगातार पैसे मांगता रहा. इस तरह से प्रोफेसर ने उसे 90 लाख रुपए का भुगतान कर दिया. शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की और आरोपी की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की. पुलिस ने सोमवार को रेड डाली और आरोपी वीरेंद्र साहनी को गिरफ्तार कर लिया. साहनी ने पुलिस को बताया कि वह एक बीमा डेटा कलेक्शन कॉल सेंटर में काम कर रहा था और 2015 में उसने अपने 2-3 सहयोगियों की मदद से कॉल सेंटर खोलकर ग्राहकों से संपर्क करना शुरू किया. पुलिस ने कहा कि इस कॉल सेंटर में उन्होंने डेटा इकट्ठा किया और लोगों के साथ ठगी की योजना बनाई.
आरोपी ने फेक पते के आधार पर खाता खोला, ताकि धोखाधड़ी के पैसे को निकाला जा सके. 2016 में साहनी का अपने साथियों के साथ झगड़ा हो गया, तब से वह अकेले काम करने लगा है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि साहनी ने बेंगलुरु में भी देसी राजू सुंदर शिवा राव के साथ 50 लाख की ठगी की थी. इसके बाद साहनी ने वडोदरा के जावेद भाई पटेल को निशाना बनाया और उनसे 20 लाख रुपए ठगे. साहनी कुल बचत पर 10 से 20 गुना मैच्योरिटी या बोनस बेनिफिट का ऑफर देकर अपने टारगेट को लुभाता था.
पुलिस के मुताबिक, साहनी लोगों का विश्वास जीतने के बाद लोगों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगता था. पुलिस ने उसके पास से एक लग्जरी कार, 15 लाख रुपए की डायमंड ज्वेलरी और बैंक अकाउंट में 2.5 लाख रुपए बरामद हुए हैं.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








