
50% अमेरिकी टैरिफ से त्रस्त हैं आंध्र प्रदेश के एक्वा किसान, सरकार से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
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मौसम की चुनौतियां, सीड क्वालिटी में उतार-चढ़ाव और घटते मुनाफे ने आंध्र प्रदेश की एक्वा इंडस्ट्री को मुश्किल मोड़ पर ला खड़ा किया है. यह सेक्टर लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़ा है. किसान और निर्यातक साफ कह रहे हैं कि अगर सरकार ने तुरंत राहत और नए बाजार खोजने की रणनीति नहीं अपनाई, तो यह नुकसान अप्रतिवर्तनीय (irreversible) हो सकता है.
आंध्र प्रदेश का एक्वा फार्मिंग सेक्टर जो तटीय जिलों में लाखों लोगों की आजीविका का सहारा है, अमेरिका की तरफ से भारतीय झींगा (श्रिम्प) आयात पर लगाए गए 50% टैरिफ (शुल्क) से बुरी तरह प्रभावित हो गया है. यह नया नियम 27 अगस्त 2025 से लागू होगा. किसान, निर्यातक और राज्य के नेता एकजुट होकर राज्य और केंद्र सरकार से तुरंत राहत देने की मांग कर रहे हैं.
मंगलवार को केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने भीमावरम में बीजेपी जिला कार्यालय पर एक्वा किसानों से मुलाकात की. किसानों ने उन्हें गिरते झींगा दाम, बढ़ते फीड कॉस्ट और सब्सिडी वाले बिजली की तत्काल जरूरत बताते हुए शिकायतें सुनाईं.
मंत्री ने दिया आश्वासन
मंत्री श्रीनिवास वर्मा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारत की आर्थिक प्रगति को व्यापारिक पाबंदियों के जरिए नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 50% इंपोर्ट टैरिफ ने न सिर्फ एक्वा इंडस्ट्री को, बल्कि देश के कई सेक्टर्स को चोट पहुंचाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले को गंभीरता से ले रहे हैं और समाधान पर काम कर रहे हैं.
साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर एकड़ खेती पर किसानों को सब्सिडी वाली बिजली मिले. उन्होंने 60–90 काउंट वाले झींगा पर अचानक आई कीमतों में कटौती का मुद्दा भी उठाया, जो मुख्य रूप से चीन और यूरोप को एक्सपोर्ट होते हैं, न कि अमेरिका को. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भी वे राज्य सरकार से बात करेंगे.
वैकल्पिक मार्केट पर फोकस

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