
36 दिन की फरारी के बाद अरेस्ट... जानें कौन हैं अमृतपाल की खालिस्तानी साजिश के 9 मास्टरमाइंड
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खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल सिंह ने 37 दिन बाद मोगा के रोडेवाला गुरुद्वारा में सरेंडर कर दिया है. उसे असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजने की तैयारी चल रही है. अमृतपाल लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बचकर यहां-वहां छिपता रहा. आइए जानते हैं कि उसकी खालिस्तानी साजिश के 9 मास्टरमाइंड कौन थे?
खालिस्तान समर्थक भगोड़ा अमृतपाल आखिरकार फरारी के 36 दिन बाग गिरफ्तार हो गया है. पंजाब पुलिस 8 राज्यों में उसकी तलाश कर रही थी. चुस्त नाकाबंदी, वाहनों की चेकिंग और लगातार पेट्रोलिंग के बाद भी वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा था. दरअसल, पुलिस से बचने में उसकी हर कदम पर मदद की जा रही थी. आइए सबसे पहले आपको बताते हैं कि वे कौन किरदार हैं, जो अमृतपाल की खालिस्तानी साजिश के लिए फंडिंग से लेकर प्लानिंग तक का काम संभाल रहे थे.
किरणदीप कौर: यह अमृतपाल की पत्नी है. इसी साल 10 फरवरी को दोनों की शादी हुई है. पुलिस को आशंका है कि किरणदीप को अमृतपाल को हो रही विदेशी फंडिंग की जानकारी है. इसके अलावा, खुफिया एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि किरणदीप कौर आनंदपुर खालसा फोर्स (AKF) और 'वारिस पंजाब दे' के लिए धन जुटाने का काम करती थी.पुलिस ने कथित विदेशी फंडिंग के मामले में किरणदीप कौर से करीब एक घंटे तक पूछताछ की थी.
तूफान सिंह: वारिस पंजाब दे का सक्रिय सदस्य है और अमृतपाल सिंह बेहद करीबी भी. आरोप है कि लवप्रीत तूफान ने अमृतपाल के खिलाफ टिप्पणी करने पर एक व्यक्ति का अपहरण कर लिया था. यह अमृतपाल के लिए लोगों को डराने-धमकाने का काम करता था. अमृतपाल ने तूफान सिंह को रिहा कराने के लिए 24 फरवरी को अजनाला थाने पर धावा बोल दिया था.
पप्पलप्रीत सिंह: यह अमृतपाल का मेन हैंडलर था. अमृतपाल इसे अपना मेंटर मानता है. पप्पलप्रीत के कहने पर ही अमृतपाल ने कट्टरपंथी सिख उपदेशक से एक साधारण व्यक्ति का रूप लिया. वह पंजाब में खालिस्तान का माहौल खड़ा करने के लिए आईएसआई के सीधे संपर्क में था. वह राज्य में आतंकवाद की साजिश कर रहा था.
दलजीत सिंह कलसी: यह अमृतपाल का फाइनेंसर था. दलजीत आईएसआई और अमृतपाल के बीच की अहम कड़ी भी है. वह पाकिस्तान के कई देशों में स्थित महावाणिज्य दूतावासों में तैनात अफसरों से संपर्क में था. विदेश से फंडिग के लिए उसने स्टर्लिंग इंडिया एजेंसी नाम की एक कंपनी बनाई थी. पड़ताल में पता चला था कि पिछले दो साल में विदेश से करीब 35 करोड़ रुपये उसने जुटाए थे. इस राशि का बहुत सा हिस्सा उसने अमृतपाल और वारिस पंजाब दे पर खर्च किया था.

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