
30 साल से सेंटा क्लॉज की वेशभूषा में जी रहा शख्स, दिल को छू लेगी ये कहानी
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क्रिसमस का त्योहार बच्चों के लिए खुशी और जादू लेकर आता है, और इस जादू का केंद्र होता है सैंटा क्लॉज. सैंटा का किरदार निभाने वाले लोग बच्चों को तोहफे देकर उनकी खुशियों को दोगुना कर देते हैं.लेकिन इंग्लैंड के वेल्स में एक ऐसा शख्स है, जिसने न केवल बच्चों की खुशियों के लिए सैंटा क्लॉज का किरदार निभाया, बल्कि इसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया.
क्रिसमस का त्योहार बच्चों के लिए खुशी और जादू लेकर आता है, और इस जादू का केंद्र होता है सैंटा क्लॉज. सैंटा का किरदार निभाने वाले लोग बच्चों को तोहफे देकर उनकी खुशियों को दोगुना कर देते हैं.लेकिन इंग्लैंड के वेल्स में एक ऐसा शख्स है, जिसने न केवल बच्चों की खुशियों के लिए सैंटा क्लॉज का किरदार निभाया, बल्कि इसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया.
30 साल पहले शुरू हुआ सफर डेली स्टार न्यूज के मुताबिक, वेल्स के स्वानसिया शहर के पास पेनलरगेर गांव में रहने वाले टेरी रीज को बच्चे आज भी सैंटा क्लॉज मानते हैं. 72 साल के टेरी ने 30 साल पहले सैंटा का किरदार निभाना शुरू किया था, लेकिन तब से लेकर आज तक वह इसी किरदार में जी रहे हैं.
टेरी की सैंटा बनने की कहानी 30 साल पहले शुरू हुई, जब उनके एक दोस्त ने उनसे अनाथ बच्चों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में सैंटा क्लॉज बनने का अनुरोध किया. टेरी ने खुशी-खुशी यह जिम्मेदारी निभाई, लेकिन यह उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई.
खुद को भूलकर सैंटा के किरदार को किया जिंदा टेरी ने अपने लुक को सैंटा क्लॉज के जैसा ही रखा. उनकी दाढ़ी और बाल आज भी सैंटा की तरह लंबे और सफेद हैं. यहां तक कि जब वह अपने सैंटा सूट में नहीं होते, तब भी बच्चे उन्हें सैंटा ही मानते हैं। उनकी इस छवि ने उन्हें गांव और आसपास के इलाकों में खास पहचान दिलाई है.टेरी हर साल क्रिसमस के मौके पर कई स्कूलों और कार्यक्रमों में सैंटा क्लॉज बनकर जाते हैं. वह बच्चों को गिफ्ट देते हैं और उनकी खुशियों का हिस्सा बनते हैं. गांव में शायद ही कोई टेरी को उनके नाम से बुलाता है, सबके लिए अब वो सैंटा ही हैं.
सैंटा बनने के पीछे इमोशनल कहानी
टेरी की जिंदगी में सैंटा क्लॉज बनने की खास वजह उनकी पत्नी भी थीं. उनकी पत्नी क्रिसमस को लेकर बेहद उत्साहित रहती थीं और हर साल उनसे सैंटा बनने की गुजारिश करती थीं. वह टेरी को उनकी ड्रेस हमेशा साथ रखने को कहतीं, ताकि छुट्टियों में भी वह सैंटा बनकर दूसरों को खुश कर सकें.

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