
26 साल के सूखे को खत्म करने की जद्दोजहद में BJP, दिल्ली फतह के लिए बनाई ये रणनीति
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दिल्ली विधानसभा चुनाव का मैदान तैयार है, जहां बीजेपी पिछले 26 साल के राजनीतिक सूखे को खत्म करने के लक्ष्य के साथ उतर रही है. आम आदमी पार्टी के खिलाफ मजबूत मोर्चा संभालते हुए, बीजेपी स्थानीय मुद्दों, नेतृत्व और राष्ट्रीय योजनाओं के बल पर मतदाताओं को रिझाने की रणनीति पर काम कर रही है.
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अगर कहें तो 'जंग का मैदान' तैयार है, और खासतौर पर बीजेपी इस जंग में जीत का ताज अपने सिर चढ़ाने की जद्दजहद में जुटी है. इस बार पार्टी का 26 साल से पड़े सूखे को बस खत्म करना ही टार्गेट है. राष्ट्रीय राजनीति में अपने प्रभुत्व के बावजूद, बीजेपी ने पिछले दो दशकों से दिल्ली विधानसभा चुनावों में बढ़त बनाने के लिए संघर्ष कर रही है.
1998 से, पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ा है, जबकि 2015 से आम आदमी पार्टी (आप) बीजेपी के सामने एक मजबूत ताकत बनकर खड़ी हुई है. दिल्ली में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी के साथ, बीजेपी से आप के गढ़ को चुनौती देने और राष्ट्रीय राजधानी को फिर से हासिल करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाने की उम्मीद है.
1. नेतृत्व संरचना में बदलाव
हरियाणा और महाराष्ट्र में भारी जीत के बाद, बीजेपी आम आदमी पार्टी के खिलाफ पूरी ताकत से उतर रही है, जिसमें पीएम मोदी सबसे आगे हैं. पीएम मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में 2 रैलियों के साथ चुनावी बिगुल फूंका और पीएम ने सीधे अरविंद केजरीवाल पर हमला किया और खुद और केजरीवाल के बीच तुलना की, लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं जिनसे बीजेपी जूझ रही है. प्रधानमंत्री का चेहरा रहने के बावजूद पार्टी के लिए बड़ी चुनौती एक मजबूत क्षेत्रीय नेता की गैर-मौजूदगी है.
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आम आदमी पार्टी के पास जहां अरविंद केजरीवाल के रूप में एक मजबूत नेता है, तो बीजेपी के पास प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के कुछ केंद्रीय नेता को जमीन पर उतारने के अलावा, स्थानीय नेता के तौर पर चुनाव प्रचार के लिए कोई और ऑप्शन नहीं है. इस मुश्किल की भरपाई के लिए बीजेपी सामूहिक नेतृत्व के मोर्चे को ही आगे बढ़ा रही है. मसलन, देखा जा रहा है कि मतदाताओं के बीच विश्वास बनाने के लिए पार्टी राष्ट्रीय नेताओं को स्थानीय मुद्दों के साथ संतुलित करने की कोशिश में है.

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