
शख्सियत: कैम्ब्रिज में खिलेगा पंकज
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लखनऊ के युवा कवि पंकज प्रसून 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में होने वाले कवि सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. पंकज प्रसून का चयन उनके व्यंग्य और विज्ञान मिश्रित कविताओं के आधार पर किया गया है.
अदब के शहर लखनऊ के कई युवा फनकारों ने अपने हुनर से सरहदें छोटी कर दी हैं. ऐसे ही एक युवा कवि प्रकज प्रसून को कैंब्रिज विश्वविद्यालय की ओर से काव्य पाठ के लिए बुलावा आया है. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय इंडिया सोसायटी की स्थापना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने की थी. यह कैम्ब्रिज का सबसे बड़ा संगठन है जो भारत और कैम्ब्रिज के बीच सांस्कृतिक सेतु बनाने का कार्य कर रहा है. गणतंत्र दिवस के मौके पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में वर्चुअल माध्यम से होने वाले कवि सम्मेलन में पंकज प्रसून का चयन उनके व्यंग्य और विज्ञान मिश्रित कविताओं के आधार पर किया गया है. वह इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. यह कार्यक्रम कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा. कार्यक्रम का संचालन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एशियन और मिडिल ईस्टर्न विभाग के प्रोफेसर ऐशवर्ज कुमार करेंगे. इस कार्यक्रम में पोलैंड की कवयित्री एलिक्जा इजराइल से लडमिला केबोतेरेब और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफसर डॉ. पद्मेश गुप्ता भाग ले रहे हैं. कैम्ब्रिज में हिंदी का परचम फैलाने जा रहे पंकज प्रसून का जन्म रायबरेली के बैसवारा इलाके में सहजौरा गांव में हुआ था. इनके पिता कमलेश शुक्ल वैद्य थे. वैद्य कमलेश के पुत्र से पंकज शुक्ल का कवि पंकज प्रसून बनने का सफर काफी रोचक है. पंकज बचपन से ही डायरी में कविताएं लिखा करते थे. वर्ष 1997 में जब ये कक्षा नौ में थे तब पिता को पंकज के कविता लिखने की जानकारी हुई. इसी वर्ष जून में अपने गांव सहजौरा में पंकज ने पहली बार कवि सम्मेलन में शिरकत किया. लोगों को पंकज की रचना इस कदर भाई कि उन्होंने इन्हें मालाओं से लाद दिया. इसके बाद पंकज के पिता ने इन्हें ‘प्रसून’ नाम दिया और अब ये पंकज प्रसून कहलाने लगे. वर्ष 2000 में पंकज ने लखनऊ के कान्यकुब्ज कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया. इसी वर्ष इन्होंने लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध हास्य कवि के.पी. सक्सेना को सुना. यहीं से पंकज को हास्य-व्यंग्य कविताएं लिखने की प्रेरणा मिली. इन्होंने के. पी. सक्सेना और गोपाल चतुर्वेदी जैसे कवियों की संगत में रहकर हास्य-व्यंग्य लेखन की विधा को समझा.
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