
'जा पर विपदा पड़त है, सोई आवत यह देश’
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चित्रकूट से 'मिशन-2022' की शुरुआत की है. आठ साल पहले भाजपा ने भी चित्रकूट से ही यूपी में सत्ता वापसी का अभियान शुरू किेया था.
रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का मन जब व्याकुल हुआ तो विनय पत्रिका में उन्होंने ‘हारे मन अब चित्रकूटहि’ लिखकर राम की तपोभूमि का बखान किया था. इसी प्रकार मुगल सम्राट अकबर के नौ रत्नों में से एक रहीम ने ‘चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा पड़त है, सोई आवत यह देश’ की रचना कर चित्रकूट की महिमा बताई थी. भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का सर्वाधिक समय चित्रकूट में ही बिताया था. लंबे समय से सत्ता से दूर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यूपी में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का अभियान चित्रकूट से ही शुरू किया था. अप्रैल 2013 में तत्कालीन नवनियुक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पार्टी की पूरी कार्यसमिति के साथ चित्रकूट में कामदगिरी की परिक्रमा कर अभियान की शुरुआत की थी. चित्रकूट में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में भी पार्टी को बूथ पर मजबूत करने की एक गहन योजना भी बनी थी. चित्रकूट से भाजपा ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी राजनीतिक शक्ति लेते रहे हैं. वर्ष 2006 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश की सत्ता में दोबारा आने के लिए भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन कर चुनावी तैयारियों की शुरुआत की थी. अपने पिता के कदमों पर चलते हुए इस बार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी “मिशन 2022” की कामयाबी के लिए इसी चित्रकूट की धरती से शुरुआत की. 7 जनवरी को चित्रकूट पहुंचे अखिलेश यादव ने यहां के एक गेस्ट हाउस में तीन दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में शिरकत किया. अगले दिन 8 जनवरी को घने कोहरे के बीच उनका काफिला शुक्रवार की सुबह साढ़े सात बजे कर्वी स्थित लोक निर्माण विभाग के डाक बंगला से कामदगिरि प्रमुख द्वार पहुंचा. कामदगिरि प्रमुख के अधिकारी संत मदन गोपाल दास ने पूर्व मुख्यमंत्री को विधिवत भगवान कामतानाथ की पूजा अर्चना कराई. अतिथि रजिस्टर में अखिलेश ने लिखा कि 'कामतानाथ की कृपा हो'. फिर पूर्व सीएम ने समर्थकों के साथ कामतानाथ और जय सियाराम के जयकारों के साथ पंचकोसी परिक्रमा की. खोही की जलेबी वाली गली में वे करीब दस मिनट रुके, दुकानदारों के साथ बैठकर चाय पी और उनका दुख दर्द सुना.
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