
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजों के क्या हैं मायने?
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हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजे सामने आ गए हैं. हरियाणा के नतीजों की गूंज दूर-दूर तक जाएगी, जहां शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बढ़त थी, लेकिन नतीजों में जीत भाजपा को मिली.
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजे सामने आ गए हैं. हरियाणा के नतीजों की गूंज दूर-दूर तक जाएगी, जहां शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बढ़त थी, लेकिन नतीजों में जीत भाजपा को मिली.
हरियाणा में जीत के बाद भाजपा ने पॉलिटिकल नैरेटिव पर कब्जा जमाए रखा, साथ ही पार्टी को वापस मोमेंटम मिल गया. बता दें कि लोकसभा के बाद कांग्रेस बनाम भाजपा का पहला बड़ा मुकाबला भाजपा के खाते में गया. भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर का सफलतापूर्वक मुकाबला किया. वहीं, कांग्रेस ने अति आत्मविश्वास और एकीकृत राज्य नेतृत्व की कमी की कीमत चुकाई है.
बात करें हुड्डा फैक्टर की तो इस वजह से गैर-जाट ओबीसी का भाजपा के पक्ष में एकीकरण हो सकता है, जबकि दलित वोट बंट गया. चुनाव के रिजल्ट में देखा गया कि कई सीटों पर जीत का अंतर भी बहुत कम रहा है. भाजपा ने कांग्रेस की तुलना में स्थानीय चुनावी कारकों को बेहतर तरीके से मैनेज किया.
जम्मू और कश्मीर में क्षेत्रीय आधार पर विभाजन जम्मू और कश्मीर में क्षेत्रीय आधार पर विभाजन हुआ है. घाटी की नंबर एक पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस रही है, जबकि जम्मू में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. देखा जाए तो हरियाणा और जम्मू और कश्मीर में छोटी पार्टियां बाहर हो गईं. हरियाणा में इंडिया गठबंधन बिखरा गया तो जम्मू और कश्मीर में अधिक एकजुटता के साथ नजर आया. हरियाणा के लिए एक वक्त आप और कांगेस में गठबंधन को लेकर बात चल रही थी, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली.
अब महाराष्ट्र और झारखंड की बारी है. ये दो राज्य तय कर सकते हैं कि 2024 में अंतिम शेखी बघारने का अधिकार किसके पास है. इस चुनाव के रिजल्ट में देखने को मिला कि मोदी फैक्टर मजबूत और लचीला है. जबकि राहुल गांधी को अपनी पार्टी को फिर से ऊपर उठाने की जरूरत है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









